जनता की उपस्थिति इस्लामी क्रांति की सफलता का कारण हैः सर्वोच्च नेता
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने 18 फ़रवरी वर्ष 1978 को तबरेज़ के जनआंदोलन की सालगिरह पर पूर्वी आज़रबाइजान की जनता को वीडियो कांफ़्रेंस के ज़रिए संबोधित किया और कहा कि इस्लामी क्रांति की सफलता का मुख्य कारण जनता की उपस्थिति है।
प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने पूर्वी आज़रबाइजान की जनता को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति न बंदूक के ज़ोर पर, न राजनीतिक दांव-पेंच से और न ही राजनीतिक पार्टियों की नीतियों से सफल हुई है, बल्कि यह महान क्रांति आम लोगो की उपस्थिति से कामयाब हुई है।
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि तबरेज़ की जनता द्वारा आरंभ किए गए जनआंदोलन ने इस महान क्रांति को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि पूरे इतिहास में 4 शताब्दि पहले से आज़रबाइजान राष्ट्रीय एकता का अग्रणी रहा है, जिसका मुख्य कारण यह है कि आज़रबाइजान, लोगों को शिक्षित करने का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च ने कहा कि क्षेत्र में दिन- प्रतिदिन बढ़ते प्रतिरोध ने साम्राज्य की धौंस को खत्म कर दिया है और उसने अमेरिका के मुकाबले में राष्ट्रों की ज़बान खोल दी है और इस नेअमत को क्रांति के जारी रहने के साथ ग़नीमत समझना चाहिये।
उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति का उद्देश्य वास्तविक प्रगति, भौतिक व आध्यात्मिक प्रगति, सामाजिक न्याय को व्यवहारिक बनाना, देश को मज़बूत बनाना, इस्लामी समाज का गठन और अंततः बड़ी व महान इस्लामी सभ्यता का गठन है।
ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा को भविष्य की बुनियादी ज़रूरत बताया और कहा कि दुश्मन को पता है कि ईरान परमाणु हथियारों की प्राप्ति के लिए प्रयास नहीं कर रहा है फिर भी वह विघ्न उत्पन्न कर रहा है उसकी वजह यह है कि वह भविष्य की ज़रूरतों को पूरा करने हेतु देश को प्रगति करने से रोकना चाहता है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने कहा कि आज़रबाइजान के लोगों को एक बात जो सबसे अलग करती है और जो उनके सम्मान को दो बराबर करती है वह यह है कि पैग़म्बरे इस्लाम (स) के परिजनों का परचम हमेशा इस क्षेत्र के लोगों के हाथों में बुलंद रहा है और यह झंडा सदियों से ऐसे ही लहरा रहा है जिसे आज़रबाइजान के लोगों ने कभी भी झुकने नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि तबरेज़ की जनता ने कुछ ऐसा किया कि ज़मीनी स्तर पर आंदोलन आरंभ हो गया था।
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के प्रोटोकॉल के मद्देनज़र, इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता लगातार दूसरे साल तबरेज़ की ईदगाह में मौजूद अवाम को वीडियो कॉन्फ़्रेंस के ज़रिए संबोधित कर रहे हैं। (RZ)
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