ईरान ने इराक़ी कुर्दिस्तान में इस्राईल के ठिकाने पर हमला क्यों किया?
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इराक़ी कुर्दिस्तान की क्षेत्रीय सरकार की आतंकवाद निरोधक इकाई ने एक बयान जारी करके कहा है कि रविवार की सुबह पूरब की ओर से 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १४, २०२२ ११:०६ Asia/Kolkata
  • ईरान ने इराक़ी कुर्दिस्तान में इस्राईल के ठिकाने पर हमला क्यों किया?

इराक़ी कुर्दिस्तान की क्षेत्रीय सरकार की आतंकवाद निरोधक इकाई ने एक बयान जारी करके कहा है कि रविवार की सुबह पूरब की ओर से 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया।

रविवार को यह हमला ज़ायोनी शासन द्वारा दमिश्क़ पर किए गए हवाई हमले के जवाब में किया गया है। लेकिन इस हमले के लिए कुर्दिस्तान में इस्राईल के जासूसी केन्द्र का चटन इसलिए किया गया, क्योंकि कुछ ही दिन पहले इस्राईल ने इस केन्द्र से ईरान के ख़िलाफ़ कार्यवाही की थी। सूत्रों का कहना है कि आईआरजीसी के मिसाइल हमले में इस्राईल के 9 जासूसों की मौत हो गई है।

इस हमले पर इस्राईल और उसके समर्थकों की प्रतिक्रिया जो भी, लेकिन इससे यह साबित हो गया है कि ईरान अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर है और वह हर उस क़दम का मुंह तोड़ जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो उसकी सुरक्षा को ख़तरे में डाल रहा होगा। इससे पहले भी ईरान ने अपनी इस नीति को साबित किया है। बग़दाद में अमरीका द्वारा ईरानी कमांडर जनरल सुलेमानी को शहीद करने के बाद ईरान ने अमरीकी सैन्य छावनी ऐनुल असद पर मिसाइलों की बारिश की थी।

दूसरे यह कि ताज़ा मिसाइल हमले में सिर्फ़ इस्राईली जासूसी एजेंसी मोसाद के ठिकाने को निशाना बनाया गया है, इसके अलावा किसी भी इराक़ी या अमरीकी केन्द्र को निशाना नहीं बनाया गया है। इसलिए ईरान के दुश्मनों द्वारा इस हमले को लेकर दुष्प्रचार और मानसिक युद्ध का कोई मतलब नहीं है। इस दुष्प्रचार का मक़सद ईरान और इराक़ के संबंधो में कड़वाहट पैदा करना है। इसलिए कहा जा सकता है कि जो कुर्द और इराक़ी अधिकारी इस्राईली ठिकाने पर हमले को लेकर आपत्ति जता रहे हैं, उन्हें इससे पहले कुर्दिस्तान में इस्राईली जासूसी एजेंसी और उसके एजेंटों  की ईरान विरोधी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए था, जिसके बारे में तेहरान ने कई बार सचेत किया था। इसके अलावा, हालिया वर्षों में ईरानी दुश्मनों ने इराक़ की सीमाओं को ईरान के हितों को नुक़सान पहुंचाने और देश की सुरक्षा को ख़तरे में डालने के लिए इस्तेमाल किया है। अमरीका ने शहीद सुलेमानी की हत्या के लिए इराक़ी सरमज़ीन को ही इस्तेमाल किया था। इसलिए ईरान की जवाबी कार्यवाही के बारे में इराक़ की संप्रभुता के उल्लंघन का ढिंढोरा पीटना, सिर्फ़ उनके दोहरे रवैये को दर्शाता है। msm

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