ईरान और चीन के विदेशमंत्रियों ने किन विषयों पर बात की?
ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों के बारे में विचारों का आदान- प्रदान किया।
ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों के बारे में विचारों का आदान- प्रदान किया।
ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों के बारे में विचारों का आदान- प्रदान किया। इस मुलाकात में ईरान के विदेशमंत्री ने कहा कि पश्चिमी देश स्वतंत्र राष्ट्रों के खिलाफ ग़ैर कानूनी प्रतिबंधों का प्रयोग एक हथकंडे के रूप में करते हैं और शांति व सुरक्षा स्थापित करने और संकटों को रोकने के लिए इस चीज़ से मुकाबला ज़रूरी व महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार इस मुलाकात में ईरान और चीन के विदेशमंत्रियों ने पश्चिम के एकपक्षीय व ग़ैर कानूनी प्रतिबंधों के मुकाबले पर बल दिया।
सिद्धांतिक रूप से एक पक्षीय प्रतिबंध पश्चिमी देशों का हथियार है जिसका प्रयोग वे हर उस देश के खिलाफ करते हैं जो उनकी वर्चस्ववादी मांगों व इच्छाओं के विरोधी होते हैं। रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों के हालिया प्रतिबंधों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। वास्तव में अमेरिका पूरी दुनिया में सबसे अधिक दूसरे देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाता है और उसके ग़ैर कानूनी प्रतिबंधों के कारण दुनिया में अब तक हज़ारों लोग काल के गाल में जा चुके हैं। रोचक बात यह है कि दुनिया में जहां भी युद्ध व हिंसा है उनमें अधिकांश में परोक्ष व अपरोक्ष रूप से अमेरिका की भूमिका है।
दूसरे शब्दों में इस समय दुनिया में जितने भी लोग युद्ध व हिंसा में मारे जा रहे हैं उनमें से अधिकांश अमेरिकी क्रिया कलापों की भेंट चढ़ रहे हैं और कितनी बड़ी विडंबना है कि इस प्रकार के कृत्यों के साथ अमेरिका मानवाधिकारों की रक्षा का दम भी भरता है और अपने आधिपत्यवादी नीतियों के विरोधी देशों के खिलाफ मानवाधिकारों के हनन की रिपोर्टें भी प्रकाशित करता है।
रोचक बिन्दु यह है कि अमेरिका में इस देश की सरकार श्यामवर्ण के लोगों के साथ क्या करती है, अमेरिकी समाज में उनके साथ किस प्रकार का बर्ताव किया जाता है उसके बारे में वह कभी कोई रिपोर्ट जारी व प्रकाशित नहीं करती। इसी प्रकार अमेरिकी सरकार उन देशों के खिलाफ मानवाधिकार के हनन के संबंध में कभी कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं करती जहां मानवाधिकारों का हनन सामान्य बात है। अभी हाल ही में सऊदी अरब ने एक ही दिन में 81 लोगों को फांसी दे दी परंतु मानवाधिकारों का राग अलापने वाले अमेरिका ने इसकी भर्त्सना तक नहीं की।
इसी प्रकार सऊदी अरब ने 26 मार्च 2015 से यमन के खिलाफ जो पाश्विक हमला आरंभ कर रखा है उसमें दसियों हज़ार यमनी मारे जा चुके हैं जिनमें ध्यान योग्य संख्या बच्चों और महिलाओं की है। सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना सऊदी अरब ने यमन के खिलाफ जो पाश्चिम हमला आरंभ कर रखा है अब वह आठंवे साल में दाखिल हो चुका है परंतु आज तक अमेरिका ने एक बार भी सऊदी अरब की तानाशाही सरकार के अपराधों की भर्त्सना तक नहीं की। यही नहीं न केवल उसने भर्त्सना नहीं की बल्कि सऊदी अरब को हथियारों से लैस भी करता है और उन्हीं हथियारों से वह यमन के निर्दोष लोगों की हत्या करता है।
अजीब बात है कि अगर कोई देश यमन संकट के बारे में कुछ बोल देता है तो सऊदी अरब और अमेरिका उस देश पर यमन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हैं परंतु अमेरिका, सऊदी अरब, अरब इमारात और उनके पिछलग्गूओं से कोई नहीं पूछता कि यमन में वे क्या कर रहे हैं? यमन पर सात वर्षों से अधिक समय से हमला और वहां के निर्दोष लोगों की हत्या यमन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं है? यही नहीं आतंकवाद से मुकाबले के बहाने अमेरिका वर्ष 2014 से सीरिया में मौजूद है और उसके हमलों में अब तक कई हज़ार लोग हताहत व घायल हो चुके हैं और धड़ल्ले से अमेरिकी सैनिक सीरियाई तेल की लूट- खसोट कर रहे हैं।
यह एसी स्थिति में है जब सीरिया की सरकार बारमबार विदेशी सैनिकों से इस देश से निकल जाने की मांग कर चुकी है। MM
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