ईरानोफ़ोबिया अमरीका और ज़ायोनी शासन का षडयंत्र- आयतुल्लाह किरमानी
आयतुल्लाह किरमानी ने कहा है कि अमरीकी धमकियां, किसी भी स्थिति में ईरान को अमरीका की विस्तारवादी नीति के सामने झुका नहीं सकतीं।
आयतुल्लाह मुहम्मद अली मोवहहेदी किरमानी ने तेहरान में जुमे के ख़ुत्बे में कहा कि अमरीका को दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और ईरान को डराने-धमकाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन धमकियों का जवाब ईरान की ओर से तीव्र प्रतिक्रिया के रूप में आ सकता है।
आयतुल्लाह किरमानी ने कहा कि अमरीका द्वारा ईरान के दो अरब डालर को हथियाने की कोशिश, किसी राष्ट्र की संपत्ति को हड़पने का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इससे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अमरीका की विश्वसनीयता कम होगी और विश्व के अन्य देश अपनी संपत्ति को अमरीका में रखने से बचेंगे।
तेहरान की इमामे जुमा ने कहा कि परमाणु वार्ता में अमरीका ने जेसीपीओए के प्रति कटिबद्ध रहने का वचन दिया था कि उसने इसका उल्लंघन किया। इस प्रकार यह सिद्ध हो गया कि अमरीका किसी भी स्थिति में भरोसे के योग्य नहीं है।
आयतुल्लाह किरमानी ने आतंकवादी गुटों विशेषकर दाइश को अमरीका सहित कुछ पश्चिमी देशों और सऊदी अरब सहित कुछ अरब देशों की ओर से किये जाने वाले समर्थन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन गुटों को इसलिए तैयार किया गया है ताकि वे इराक़, सीरिया और यमन में आम लोगों की हत्याएं करने के साथ ही वर्चस्ववादियों की योजनाओं को लागू करें।
आयतुल्लाह मुहम्मद अली मोवहहेदी किरमानी ने कहा कि ईरानोफ़ोबिया वास्तव में अमरीका और ज़ायोनी शासन की संयुक्त योजना है जिसे व्यवहारिक बनाने के लिए अमरीका, सऊदी अरब और अपने कुछ अरब एवं पश्चिमी घटक देशों से सहायता ले रहा है।