ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति क्यों तेहरान आये हैं?
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एक उच्चस्तरीय शिष्टमण्डल के साथ ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति रविवार को राजधानी तेहरान पहुंचे।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ३०, २०२२ १३:१६ Asia/Kolkata

एक उच्चस्तरीय शिष्टमण्डल के साथ ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति रविवार को राजधानी तेहरान पहुंचे।

इमामअली रहमान का मेहराबाद हवाई अड्डे पर ईरान के ऊर्जा मंत्री अली अकबर मेहराबियान ने स्वागत किया।  वे एक आर्थिक एवं राजनीतिक शिष्टमण्डल के साथ ईरान पहुंचे हैं।

इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने सितंबर 2021 को ताजिकिस्तान की राजधानी दोशंबे की यात्रा की थी।  उनकी इस यात्रा के दौरान ईरान तथा ताजिकिस्तान के बीच 8 सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे।  ताजिकिस्तान के मूलभूत ढांचे को मज़बूत करने और वहां के आर्थिक विकास में ईरान पहले से सहयोग करता आ रहा है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान वह पहला देश था जिसने ताजिकिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता दी थी और साथ ही ईरान ही वह पहला देश था जिसने दोशंबे में अपना दूतावास खोला था। ईरान तथा ताजिकिस्तान के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबन्ध हैं। ईरान की विदेश नीति में ताजिकिस्तान को विशेष स्थान हासिल है।

ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमामअली रहमान की दो दिवसीय ईरान यात्रा के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। इसके अतिरिक्त आर्थिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के बारे में परस्पर विचार-विमर्श किया जाएगा। ताजिकिस्तान के विदेशमंत्री, ऊर्जा मंत्री, और व्यापार मंत्री सहित इस देश के वरिष्ठ अधिकारी इमाम अली रहमान के साथ तेहरान आये हैं। राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने पहली मई को एक टेलीफोनी वार्ता में ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति को ईरान आने के लिए आमंत्रित किया था।

हालिया दो वर्षों के दौरान ईरान और ताजिकिस्तान के संबंध व सहयोग पहले से अधिक मजबूत हुए हैं। पिछले वर्ष सितंबर महीने में ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी की ताजिकिस्तान यात्रा और कल ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमाम अली रहमान की तेहरान यात्रा को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

पश्चिम एशिया के कुछ क्षेत्रों में अशांति का जारी रहना, क्षेत्र से अमेरिका का निष्कासन और इसी प्रकार यूक्रेन युद्ध का जारी रहना वे चीज़ें हैं जो इस बात का कारण बनी हैं कि क्षेत्र के देश एक दूसरे से निकट सहयोग करके चुनौतियों का मुकाबला करें। इस्लामी गणतंत्र ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय देश विदेशियों के हस्तक्षेप के बिना आपस में सहयोग व सहकारिता करके चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं।

बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि क्षेत्र में विदेशियों की उपस्थिति से न केवल सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो रही है बल्कि विदेशियों की उपस्थिति असुरक्षा और बहुत सी समस्याओं के उत्पन्न होने का कारण है। अफगानिस्तान में अमेरिका और नैटो सैनिकों की 20 वर्षों तक उपस्थिति को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। क्योंकि बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि अफगानिस्तान की बहुत सी समस्याओं की जड़ और उनका कारण इस देश में अमेरिका और घटक सैनिकों की उपस्थिति रही है।

ईरान और ताजिकिस्तान के मध्य बहुत अधिक संभावनायें मौजूद हैं और दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में एक दूसरे से सहयोग करके द्विपक्षीय संबंधों को अधिक से अधिक विस्तृत व प्रगाढ़ बना सकते हैं।

बहरहाल ईरान और ताजिकिस्तान के संबंधों और सहकारिता में मजबूती न केवल दोनों देशों बल्कि क्षेत्रीय देशों के भी हित में है। MM

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