ईरानी नागरिक को आजीवन कारावास, स्वीडन के प्रभारी राजदूत विदेशमंत्रालय में तलब
स्वीडन की एक अदालत ने एक ईरानी नागरिक हमीद नूरी को आजीवन कारावास का दंड सुनाया है जिसके विरोध में स्वीडन के प्रभारी राजदूत को तेहरान में विदेशमंत्रालय में तलब किया गया।
समाचार एजेन्सी तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार स्वीडन की एक अदालत ने इस देश की जेल में बंद ईरानी नागरिक हमीद नूरी को आजीवन कारावास का दंड दिया है जिसके विरोध में विदेशमंत्रालय में स्वीडन के प्रभारी राजदूत को तलब किया गया और इस संबंध में उन्हें ईरान की आधिकारिक आपत्ति से अवगत कराया गया।
अलबत्ता समाचार एजेन्सी रोयटर ने बताया है कि हमीद नूरी के वकील अदालत के फैसले पर आपत्ति जता और इस फैसले के खिलाफ फिर से अपील कर सकते हैं।
हमीद नूरी ईरान की न्याय पालिका के एक पूर्व कर्मचारी थे और न्याय पालिका से रिटायरमेंट लेकर वह स्वतंत्र रूप से काम करते थे और अपनी मुंहबोली बेटी के पारिवारिक मतभेदों के समाधान के लिए वह स्वीडन गये थे पर स्वीडन में दाखिल होते ही इस देश की पुलिस ने उन्हें एअरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया और अब तक उन्हें अकेले सेल में रखा गया था।
आतंकवादी गुट एमकेओ के निराधार दावे के अनुसार एक समय में हमीद नूरी उस कारावास के जेलर थे जिसमें उसके सदस्यों को बंद करके रखा गया था। विदेशमंत्रालय ने हमीद नूरी के खिलाफ स्वीडन की अदालत के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा है कि हमीद नूरी के खिलाफ दिया गया फैसला ग़ैर कानूनी और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
अभी हाल ही में ईरान के विदेशमंत्री अमीर अब्दुल्लाहियान ने स्वीडन के अपने समकक्ष से टेलीफोनी वार्ता में हमीद नूरी को तुरंत आज़ाद करने की मांग की थी और स्वीडन के विदेशमंत्री ने भी कहा था कि इस देश की न्यायपालिका आतंकवादी गुट एमकेओ के प्रचार से प्रभावित नहीं होगी।
ज्ञात रहे कि हमीद नूरी को नौ नवंबर 2019 को स्वीडन में एमकेओ के निराधार दावों के आधार पर गिरफ्तार करके अकेले सेल में रखा गया था और उन्हें अपने परिजनों से मुलाकात यहां तक कि टेलीफोन से बात करने की भी अनुमति नहीं दी गयी थी। इसी प्रकार उन्हें अपनी मर्ज़ी से वकील करने का अधिकार भी नहीं दिया गया।
इससे पहले विदेशमंत्राल के प्रवक्ता नासिर कनआनी ने स्वीडन की अदालत के फैसले की तीव्र भर्त्सना की थी और कहा था कि ईरान स्वीडन की अदालत के फैसले को गैर कानूनी और अस्वीकार्य मानता है और स्वीडन की अदालत के इस फैसले के कारण द्विपक्षीय संबंधों को जो क्षति पहुंचेगी उसके लिए तेहरान उसे ज़िम्मेदार समझेगा। MM
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