ईरान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए आगे आए क्षेत्रीय अरब देश
ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने ट्वीट किया कि मैंने कुवैत, यूएई, ओमान, क़तर और इराक़ के अपने समकक्षों से टेलिफोन पर वार्ताएं की हैं।
अब्दुल्लाहियान ने लिखा कि इन विदेश मंत्रियों से क्षेत्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। ईरान के विदेशमंत्री ने लिखा कि संबन्धों को विकसित करना और आपसी समस्याओं का समाधान, मधुर संबन्धों की ज़रूरत है। उनका कहना था कि ईरान अपने पड़ोसियों के साथ परस्पर सहयोग में वृद्धि करेगा। अब्दुल्लाहियान के अनुसार क्षेत्रीय सहयोग की प्रक्रिया को विदेशी रोक नहीं पाएंगे।
ईरान की तेरहवीं सरकार ने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग को अपनी विदशे नीति में प्राथमिकता दे रखी है। यह सरकार पड़ोसियों विशेषकर फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों के साथ संबन्धों में विस्तार के साथ ही भ्रांतियों के निवारण के लिए भी प्रयासरत है। ईरान के पड़ोसी देश भी ईरान के महत्व को समझते हुए इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ अपने संबन्धों को विस्तृत करने की कोशिश कर रहे हैं।
उदाहरण स्वरूप ईरान के साथ कुछ आंशिक मतभेदों के बावजूद कुवैत ने फैसला किया है कि वह तेहरान के साथ अपने संबन्धों को मज़बूत करेगा। इसी निर्णय के परिप्रेक्ष्य में कुवैत का नया राजदूत तेहरान आ रहा है। सात वर्षों के बाद संयुक्त अरब इमारात ने भी फैसला किया है कि वह कूटनीतिक क्षेत्र में ईरान के साथ अपने रिश्तों को राजदूत के स्तर तक बढ़ाएगा।
इसी संदर्भ में यूएई के विदेशमंत्री ने दोनो देशों के संबन्धों के बारे में कहा है कि इन दो पड़ोसी देशों में परस्पर संबन्ध विशेष महत्व रखते हैं। इसी बीच इराक़ की मध्यस्था में बग़दाद में ईरान और सऊदी अरब के बीच होने वाली वार्ता और उसके परिणामों के प्रति दोनो पक्षों की रज़ामंदी के बाद मिस्र और जार्डन ने भी ईरान के साथ संबन्धों को विस्तृत करने का इच्छा व्यक्त की है।
क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को मज़बूत करने के लिए यह प्रयास एसी स्थति में जारी हैं कि जब अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपनी हालिया मध्यपूर्व यात्रा के दौरान ईरान के विरुद्ध घिसेपिट दावे करके यह प्रयास किया इस प्रका से वे अवैध ज़ायोनी शासन की स्थति को मज़बूत करने के उद्देश्य से ईरान के विरुद्ध एक क्षेत्रीय गठबंधन तैयार करे। हालांकि इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ उसके पड़ोसी देशों की ओर से संबन्धों को विस्तृत करने की प्रक्रिया ने अमरीकी उद्देश्यों को चोट पहुंचाई है। इस प्रकार से ईरान को अलग-थलग करने की अमरीकी कोशिश फिर विफल हो गई।
क्षेत्रीय देश इस वास्तविकता को पूरी तरह से समझ चुके हैं कि ईरान जैसे प्रभावशाली देश को अनेदखा नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि उन्होंने ईरान विरोधी गठबंधन बनाए जाने की अमरीकी योजना का साथ नहीं दिया। इस संदर्भ में सऊदी अरब के विदेशमंत्री फैसल बिन फ़रहान ने कहा है कि "अरब नेटो" नाम की कोई चीज़ मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ वार्ता का एकमात्र मार्ग कूटनीतिक वार्ता है।
इसी बीच जार्डन में ईरान के पूर्व राजदूत ने कहा है कि अबतक ईरान के साथ पड़ोसी देशों के संबन्धों के विस्तार की सबसे बड़ी बाधा अमरीका था और इस्राईल मतभेदों को हवा दिया करता था किंतु क्षेत्र में अमरीका की लगातार पराजयों के बाद एसा लगता है कि क्षेत्रीय देशों ने ईरान के साथ अपने संबन्धों को विस्तृत करने का मन बना लिया है।
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