चुनौतियों का सामना करके ईरान अधिक मज़बूत होगा, जनरल सलामी
ईरान की इस्लामी क्रांति फ़ोर्स आईआरजीसी के चीफ़ कमांडर जनरल हुसैन सलामी ने कहा है कि जो लोग प्रतिबंधों द्वारा ईरान को निष्क्रिय करना चाहते थे, वह आज ख़ुद ही अलग-थलग पड़ गए हैं।
ईरान की वैज्ञानिक, औद्योगिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रक्षा प्रगति का उल्लेख करते हुए आईआरजीसी के चीफ़ कमांडर जनरल हुसैन सलामी ने कहा कि दिखावटी रूप से विकसित देशों और विश्व स्तरीय शक्तियों के समाज में अव्यवस्था और परेशानी पाई जाती है।
हालिया दशकों में पश्चिमी देशों ने स्वतंत्र देशों पर दबाव बनाने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। 1990 के दशक से अमरीका, यूरोपीय संघ और अन्य विकसित देशों ने दूसरे देशों पर सैकड़ों बार प्रतिबंध लगाए हैं।
1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से ही पश्चिमी देशों ने तेहरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगा रखे हैं और हालिया वर्षों में प्रतिबंधों को अधिक कड़ा कर दिया है।
इस संदर्भ में जनरल सलामी का कहना था कि प्रतिबंधों को हथकंडा बनाकर पश्चिमी देशों के शासक दूसरे देशों की संपत्तियों की लूटमार कर रहे हैं।
ईरान के कुछ हिस्सों में होने वाले हालिया दंगों और हिंसक प्रदर्शनों के बारे में आईआरजीसी के कमांडर का कहना था कि ईरान की इस्लामी क्रांति को समय-समय पर अपने बाहरी शत्रुओं से हिसाब चुकता करने की ज़रूरत है, क्योंकि इस्लामी गणतंत्र का विकास और मज़बूती इन्हीं चुनौतियों में निहित है। msm