यूरोपीय संघ ने लगाए ईरान पर नए प्रतिबंध
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ब्रिटेन के सहयोग से यूरोपीय संघ ने सोमवार को ईरान के विरुद्ध नए प्रतिबंध लगाए हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov १५, २०२२ १४:५७ Asia/Kolkata

ब्रिटेन के सहयोग से यूरोपीय संघ ने सोमवार को ईरान के विरुद्ध नए प्रतिबंध लगाए हैं।

विश्व के स्वतंत्र देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप पर आधारित अन्तर्राष्ट्रीय क़ानून की अवहेलना करते हुए ब्रिटेन ने ईरान पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए नए प्रतिबंध लगाए गए।

ईरान के जिन 29 लोगों को प्रतिबंधित किया गया है उनमें ईरान के संचार मंत्री ईसा ज़ारेपूर का नाम भी शामिल है।  यूरोपीय संघ ने अपने नए प्रतिबंधों में ईरान के 29 लोगों और 3 संस्थाओं को शामिल किया है।  जिन लोगों को प्रतिबंधित किया गया है उनमें सुरक्षाबलों के 4 सदस्य, आईआरजीसी तथा सुरक्षाबलों के कुछ कमांडरों और ईरान की थल सेना के प्रमुख क्यूकर्स हैदरी भी शामिल हैं।

इनके अतिरिक्त ईरान के गृहमंत्री अहमद वहीदी और देश के साइबर पुलिस प्रमुख वहीद मजीद भी इन प्रतिबंधों का शिकार हुए हैं।  यूरोपीय संघ ने ईरान के अंग्रेजी भाषा के टीवी चैनेल प्रेस टीवी को भी अपने हमले का निशाना बनाया है।  इन नए प्रतिबंधों के अन्तर्गत इन लोगों की संपत्तियों को सीज़ करना और यूरोपीय कंपनियों एव नागरिकों को वित्तीय भुगतान पर भी रोक होगी।  इस प्रकार मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप में यूरोपीय संघ ने अबतक ईरान के 126 लोगों और 11 कंपनियों को प्रतिबंधित किया है।

इस संदर्भ में जर्मनी के चांस्लर कहते हैं कि प्रतिबंध वे रास्ता हैं जिनके माध्यम से हम ईरान पर अधिक से अधिक दबाव बड़ा रहे हैं।  उन्होंने ईरान में अशांति एवं उपद्रव को साहसिक संघर्ष का नाम दिया है और विध्वंसक कार्यवाहियों की सराहना की है।  हालांकि इसी दौरान पश्चिमी और सऊदी अरब के फंड से चलने वाले फारसी भाषी संचार माध्यम ईरान विरोधी दुष्प्रचार और झूठ बोलने में लगे हुए हैं।  इनमें से एक टीवी चैनेल है ईरान इंटरनैश्नल जो ब्रिटेन के मार्गदर्शन और सऊदी अरब के पैसे से झूठे आरोप लगाने में व्यस्त है। 

इस प्रकार के संचार माध्यम पूरी स्वतंत्रता के साथ उपद्रव और उपद्रवियों का समर्थन कर रहे हैं।  इसी के साथ वे लोगों को विध्वंसक कार्यवाहिंया करने, हिंसक कामों और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए उकसा रहे हैं।  इसके अतिरिक्त वे उपद्रवियों को ज्वलंतशील पदार्थ बनाकर उनको प्रयोग करने का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

यहां पर यह सवाल पैदा होता है कि वे यूरोपीय जो हमेशा ही मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दम भरते हैं, क्या वे अपने यहां उन संचार माध्यमों को सक्रिय रहने की अनुमति देंगे जो वहां के लोगों को हथियार बनाने और हिंसा के लिए उकसाने जैसे काम करते हों?  हालांकि उन्होंने ईरान के विरुद्ध एसा ही व्यवहार अपना रखा है।  पश्चिम का यह काम वास्तव में आज़ादी और मानवाधिकारों की सुरक्षा के बारे में उनके दोहरे मानदंडों का परिचायक है।

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