ईरान की प्रगति से शत्रु हुए परेशानः वरिष्ठ नेता
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इस्फ़हान से आए हुए समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ मुलाक़ात में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखें।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov २०, २०२२ १०:१२ Asia/Kolkata

इस्फ़हान से आए हुए समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ मुलाक़ात में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखें।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने जिन मुद्दों पर बात की उनमें से एक, ईरान की प्रगति और उसकी क्षमताएं थीं।  उन्होंने कहा कि अमरीका के नेतृत्व में पश्चिम, इससे बहुत घबराया हुआ है।

पिछले चार दशकों के दौरान ईरान ने आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक, कृषि, आद्योगिक, तकनीक सहित अन्य क्षेत्रों में जो उल्लेखनीय प्रगति की है उसको स्वीकार करने पर शत्रु तक विवश हुए हैं।  इस्लामी क्रांति की सफलता के चार दशकों के बाद ईरान बहुत ही तेज़ी से आत्मनिर्भर्ता की ओर बढ़ा है। 

इस दौरान गैस तथा तेल उद्योग, पेट्रोकैमिकल उद्योग और हैवी इन्डस्ट्री सहित कई उद्योगों में विदेश पर ईरान की निरभर्ता कम हुई है।  दूसरी ओर ईरान के युवा वैज्ञानिकों ने नैनो टेकनालाॅजि, स्टेम सेल और अंतरिक्षण के श्रेत्र में उल्लेखनीय सफलताएं अर्जित की हैं।  ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से ईरान ने पिछले 44 वर्षों के दौरान जो उपलब्धियां हासिल की हैं उनको इस देश के शत्रु भी अब अनदेखा नहीं कर पा रहे हैं।  ईरान की इन उपलब्धियों ने पश्चिम विशेषकर अमरीका को अचंभित कर रखा है। 

यही कारण है कि उल्लंघन, दबाव और प्रतिबंधों के माध्यम से वह इनको रोकना चाहता है।  अपने संबोधन में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने कहा कि ईरान और साम्राज्यवाद की लड़ाई में अमरीका फ़्रंट लाइन पर खड़ा है और यूरोप, अमरीका के पीछे है।  उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हमारी मुख्य चुनौती ठहराव के मुक़ाबले में प्रगति है।  हम इस समय प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं।  वर्चस्ववादी शक्तियां, इस्लामी गणतंत्र ईरान की प्रगति और उसके विका से चिंतित और बेचैन हैं।  

इस्लामी क्रांति के नेता ने कहा कि विश्व साम्राज्यवाद और अमरीका को इस्लामी गणराज्य ईरान से यह तकलीफ़ है कि अगर यह सिस्टम इसी तरह से प्रगति करता है और दुनिया में नाम पैदा करता है तो पश्चिम के उदारवादी लोकतंत्र का दृष्टिकोण ही सवालों में घेरे में आ जाएगा।  

वरिष्ठ नेता का कहना था कि अपनी इसी तिलमिलाहट और आक्रोश में अमरीकी और यूरोपीय अपने सारे संसाधनों के साथ मैदान में उतर आए हैं मगर वे अपना सा मुंह लेकर रह जाते हैं। जिस तरह इससे पहले भी कुछ नहीं कर पाए थे उसी प्रकार से वे आगे भी कुछ बिगाड़ नहीं पाएंगे।

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