आज आतंकवाद से मुकाबले के महानायक की तीसरी बर्सी है
आज ईरान की इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीस की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत की तीसरी बर्सी है। इस अवसर पर विभिन्न देशों में कार्यक्रम कई दिनों से आयोजित हो रहे हैं।
शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी आतंकवाद से मुकाबला करने के महानायक थे। उन्होंने इराक और सीरिया में आतंकवाद से मुकाबले में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। शहीद जनरल कासिम सुलैमानी की भूमिका और प्रयास न होते तो आज इराक और सीरिया दोनों देशों में आतंकवादी गुट दाइश की सरकार होती।
रोचक बात यह है कि शहीद जनरल कासिम सुलैमानी ने जहां आतंकवादियों का सफाया करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है वहीं मुसलमानों के अलावा ईसाई और ईज़दी समुदाय के लोगों विशेषकर लड़कियों और महिलाओं को दाइश के आतंक से मुक्ति दिलाई। वर्ष 2011 में सीरिया और इराक में दाइश का आतंक विस्तृत हुआ और इराक और सीरिया ने आधिकारिक तौर पर आतंकवाद से मुकाबले में ईरान से सहायता मांगी और ईरान ने दाइश और दूसरे आतंकवादी गुटों से मुकाबले में इन देशों की सहायता की।
दूसरे शब्दों में आज अगर ईरान और शहीद जनरल कासिम सुलैमानी के प्रयास न होते तो इन दोनों देशों में आतंकवादी गुट दाइश की सरकार होती। यही नहीं पश्चिमी और यूरोपीय देशों को भी शहीद जनरल कासिम सुलैमानी के प्रयासों का आभारी होना चाहिये। क्योंकि अगर शहीद जनरल कासिम सुलैमानी ने आतंकवादियों के सफाये में उल्लेखनीय भूमिका न निभाया होता तो आतंकवाद का अभिशाप पश्चिमी व यूरोपीय देशों तक पहुंचता जबकि पश्चिमी और यूरोपीय देशों ने आतंकवाद से मुकाबले में अब भी दोहरा मापदंड अपना रखा है।
बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि आतंकवाद के अस्तित्व में आने का महत्वपूर्ण कारण पश्चिमी व यूरोपीय देशों की भूमिका है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इस देश की पूर्व विदेशमंत्री हिलैरी क्लिंटन के उन बयानों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि दाइश को अमेरिका ने बनाया है। ध्यान योग्य बिन्दु है कि यह केवल अमेरिकी अधिकारी नहीं हैं जो इस बात को स्वीकार रहे हैं कि दाइश को अमेरिका ने बनाया है बल्कि दूसरे पश्चिमी व यूरोपीय नेता भी कह चुके हैं कि दाइश अमेरिकी नीति की उपज है। कितनी विचित्र बात है कि अमेरिका एक ओर आतंकवाद से मुकाबले का दावा करता है और दूसरी ओर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व विदेशमंत्री हिलैरी क्लिंटन ने कहा है कि दाइश को अमेरिका ने बनाया है।
सवाल यह पैदा होता है कि अमेरिका ने दाइश जैसे आतंकवादी गुट को क्यों बनाया? इसके जवाब में बहुत से जानकार हल्कों का कहना है कि अमेरिका दाइश का प्रयोग अपने एक हथकंडे के रूप में करता है और आज इराक और सीरिया में अमेरिका ने जो अपना प्रभाव जमा रखा है वह आतंकवादी गुटों विशेषकर दाइश के क्रियाकलापों का परिणाम है और दाइश सहित दूसरे आतंकवादी गुटों ने अमेरिकी हस्तक्षेप और उपस्थिति की भूमि प्रशस्त की।
इस बीच शहीद जनरल कासिम सुलैमानी इराक और सीरिया दोनों देशों में आतंकवाद से मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे जिसकी वजह से वह अमेरिकी आंखों की किरकिरी बने हुए थे और इसी किरकिरी को दूर करने के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने जनरल कासिम सुलैमानी को शहीद करने का आदेश दिया और आज ही के दिन अमेरिका के आतंकवादी सैनिकों ने बगदाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के समीप ड्रोन से हमला करके उन्हें और उनके कई साथियों को शहीद कर दिया और पूरी दुनिया ने देख लिया कि अमेरिका न केवल आतंकवाद से मुकाबले में सच्चा नहीं है बल्कि आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक है। MM