हर हाल में फ़िलिस्तीन का समर्थन जारी रखेंगेः वरिष्ठ नेता
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि ईरानोफोबिया का मुख्य कारण इस्लामी गणतंत्र ईरान द्वारा बेफिक्र होकर फ़िलिस्तीनियों का समर्थन करना है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि ईरान की इस्लामी व्यवस्था बिना किसी हिचकिचाहट के फ़िलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन करती रहेगी।
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) की पैग़म्बरी की घोषणा के अवसर पर शनिवार को इस्लामी गणतंत्र ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों, इस्लामी देशों के प्रतिनिधियों, राजदूतों तथा पवित्र क़ुरआन के अंतर्राष्ट्रीय मुक़ाबले में शामिल होने वाले मेहमानों ने तेहरान में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता से मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात में वरिष्ठ नेता ने फिलिस्तीन की अत्याचारग्रस्त जनता के समर्थन के संबन्ध में इस्लामी गणतंत्र ईरान की स्पष्ट नीतियों की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि वे सरकारें जिनकों फ़िलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन करना चाहिए था वे इस्लाम के शत्रुओं की हां में हां मिलते हुए ईरानोफ़ोबिया के प्रचार में लगी हुई हैं। वरिष्ठ नेता का कहना था कि फ़िलिस्तीन का मामला, इस्लामी जगत की कमज़ोरी और उसके घाव का हिस्सा है। एक राष्ट्र इस समय इस्लामी जगत के सामने एक अत्याचारी और दुष्ट शासन के अत्याचारों का शिकार है जबकि इस्लामी देश अनपी संपदा, क्षमताओं और धन-दौलत के बावजूद केवल मूक दर्शक बने हुए हैं।विशेष बात यह है कि इन्ही में कुछ देश तो हालिया दिनों में इस ख़ूंख़ार शासन के पिछलग्गू बने हुए हैं।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने आगे कहा कि अब तो यह हालत हो गई है कि मुसलमानों की समस्याओं का समाधान करने का दावा करते हुए अमरीका, फ्रांस तथा कुछ अन्य देश, इस्लामी जगत में हस्तक्षेप को अपना अधिकार समझ बैठे हैं। हालांकि यह वे देश हैं जो स्वयं अपनी व्यवस्था को चलाने में पूरी तरह से अक्षम रहे हैं।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि अगर आरंभ में ही इस्लामी सरकारें वरिष्ठ धर्मगुरूओं विशेषकर नजफ़ के धर्मगुरूओं के हमदर्दी से भरे सुझावों को मान लेते तो आज निश्चित रूप से पश्चिमी एशिया का वह हाल नहीं होता जो इस समय है। इस्लामी राष्ट्र और सरकारें अधिक एकजुट होतीं। उन्होंने कहा कि इस्लामी जगत की समस्याओं का समाधान इस्लामी सरकारों के एकजुट होने में निहित है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने तुर्किये और सीरिया में आने वाले भूकंप के प्रभावितों के प्रति सहानुभूति व्यक्ति की। आप ने अंत में कहा कि फ़िलिस्तीन जैसा संकट और अमरीकी हस्तक्षेप जैसे मुद्दों को इस्लामी राष्ट्रों को हमेशा अपने दृष्टिगत रखना चाहिए।
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