मानवाधिकारों का वास्तविक हननकर्ता कौन हैै?
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श्रोताओ जैसाकि आपको ज्ञात है कि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar ०९, २०२३ ११:२० Asia/Kolkata

श्रोताओ जैसाकि आपको ज्ञात है कि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस अवसर पर महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्थिति से आम जनमत को जागरुक व अवगत कराने के उद्देश्य से विभिन्न देशों में कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं और बहुत से देश इस अवसर पर विज्ञप्ति जारी करते हैं। ईरान के मानवाधिकार आयोग ने भी इस अवसर पर एक विज्ञप्ति जारी किया। इस विज्ञप्ति में आया है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को महिलाओं के प्रति सरकारों, समाजों और विद्वानों की प्रतिबद्धताओं को बयान करने वाला होना चाहिये और आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों पर होने वाला अत्याचार चिंताजनक है।

इसी प्रकार इस विज्ञप्ति में आया है कि अमेरिका जैसे देशों की एक पक्षीय नीतियों व कार्यवाहियों ने मानवीय समाजों की शांति व सुरक्षा और नागरिक तानाबाने को कमज़ोर कर दिया है और यह नीतियां व कार्यवाहियां महिलाओं को अपने अधिकारों की प्राप्ति की दिशा में बाधा बन रही हैं। इसी प्रकार ईरान के मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी होने वाली विज्ञप्ति में आया है कि अमेरिकी कार्यवाहियां और एक पक्षीय व अमानवीय प्रतिबंधों के क्रियान्वयन हेतु दूसरे देशों की कार्यवाहियां मानवता विरोधी अपराध हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन देशों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वे इस संबंध में सवालों का जवाब दें।

रोचक बात यह है कि अमेरिका और पश्चिमी देश मानवाधिकार के समर्थन की बात करते हैं परंतु यही देश पूरी दुनिया में मानवाधिकार का हनन करते हैं। मिसाल के तौर पर अफगानिस्तान, इराक, सीरिया और यमन जैसे देशों में मानवाधिकार का हनन किसने किया और कौन से देश कर रहे हैं? अमेरिका आतंकवाद से मुकाबले और शांति व सुरक्षा स्थापित करने के बहाने 20 वर्षों तक अफगानिस्तान में मौजूद रहा परंतु वहां से न तो आतंकवाद का सफाया हुआ और न हीं शांति व सुरक्षा स्थापित हो पायी। अमेरिकी सैनिकों ने कितने निर्दोष अफगानी नागरिकों की हत्या कर दी। यही हाल इराक, सीरिया और यमन जैसे देशों का भी है।

इन देशों में भी अमेरिकी और पश्चिमी देशों के सैनिकों ने हज़ारों निर्दोष लोगों की हत्या कर दी। दूसरे शब्दों में अमेरिका और उसकी हां में हां मिलाने वाले देशों ने इराक, सीरिया और यमन जैसे देशों में मानवाधिकार का जो हनन किया और कर रहे हैं और इन देशों के लोगों को आज जिन समस्याओं का सामना है उनमें से बहुत का संबंध मानवाधिकारों का राग अलापने वाले देशों के क्रियाकलापों से है। मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले देशों से पूछा जाना चाहिये कि अमेरिका और उसकी अगुवाई में काम करने वाले सैनिकों ने अफगानिस्तान, इराक, सीरिया और यमन जैसे देशों में जिन निर्दोष लोगों की हत्या की है उन पर मुकद्दमा कब चलाया जायेगा और इन सैनिकों को उनके कृत्यों का दंड कब दिया जायेगा?

इसी प्रकार इस समय अमेरिका और उसके पिछलग्गू देशों की नीतियों की वजह से दूसरे देश और वहां के आम लोग जिन भयावह परिणामों को भुगत रहे हैं उसकी सज़ा इन देशों को कब और कौन देगा? अमेरिका और उसकी हां में हां मिलाने वाले देश मानवाधिकार की रक्षा का दम भरते हैं परंतु उन्होंने कोरोना काल के दौरान भी ईरान को कोरोना से मुकाबले के लिए आवश्यक दवाइयां खरीदने की अनुमति नहीं दी और उनके अमानवीय व अत्याचारपूर्ण प्रतिबंधों के कारण बहुत से ईरानी अपनी जान से हाथ धो बैठे।

सारांश यह कि मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले अमेरिका और उसके पिछलग्गू देश मानवाधिकार के हनन में सर्वोपरि हैं और वे दूसरे देशों को नसीहत करने के लायक नहीं हैं। MM

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