ईरान और रूस के मध्य निकट सहकारिता की वजह क्या है?
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बुधवार को मॉस्को में ईरान और रूस के विदेशमंत्रियों ने एक दूसरे से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और परस्पर रूचि के विषयों के बारे में विचारों का आदान- प्रदान किया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar ३०, २०२३ ०९:२१ Asia/Kolkata

बुधवार को मॉस्को में ईरान और रूस के विदेशमंत्रियों ने एक दूसरे से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और परस्पर रूचि के विषयों के बारे में विचारों का आदान- प्रदान किया।

हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने बुधवार को मॉस्को में अपने रूसी समकक्ष सरगेई लावरोफ़ के साथ मुलाकात की जिसमें उम्मीद जताई कि अगले एक महीने से कम की अवधि में दोनों देशों के विदेशमंत्रालय दीर्घकालीन सहकारिता समझौतों को अंतिम रूप दे देंगे। इसी प्रकार इस मुलाकात में रूसी विदेशमंत्री सरगेई लावरोफ़ ने भी इस बात पर खुशी व्यक्त की कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के बीच होने वाली सहकारिता रचनात्मक है।

हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान जब से ईरान का विदेशमंत्री बने हैं तब से यह उनकी चौथी रूस यात्रा है। कुछ कारणों से ईरान और रूस के मध्य होने वाली सहकारिता महत्वपूर्ण है जैसे दोनों पड़ोसी देश हैं, कैस्पियन सागर में दोनों के हित हैं और बहुत से मामलों में तेहरान और मॉस्को के दृष्टिकोण एक दूसरे से निकट व समान हैं। इस दृष्टि से ईरान के विदेशमंत्री की यह रूस यात्रा भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ईरान और रूस समस्त क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत बनाने के इच्छुक हैं और साथ ही दोनों देशों को पश्चिम विशेषकर अमेरिका के एकपक्षीय व गैर कानूनी प्रतिबंधों का सामना है। अलबत्ता मुख्य रूप से यही विषय द्विपक्षीय, बहुपक्षीय और क्षेत्रीय स्तर पर संबंधों में वृद्धि का कारण बना है। मध्य एशिया, काकेशिया, अफगानिस्तान, यमन, इराक, सीरिया और आतंकवाद से मुकाबले जैसे विषयों के बारे में ईरान और रूस के समान दृष्टिकोण हैं और इसी संबंध में अगले सप्ताह मॉस्को में ईरान, रूस, सीरिया और तुर्किये की सम्मिलित से एक बैठक होने वाली है।

इस चार पक्षीय बैठक का लक्ष्य आतंकवाद से मुकाबला जैसे विषय के बारे में इन देशों के दृष्टिकोणों को एक दूसरे से निकट लाना है। ईरान और रूस ट्रांज़िट और बैंकिग सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक दूसरे से सहयोग कर रहे हैं। इसी प्रकार ईरान और रूस, उत्तर से दक्षिण कॉरिडोर को सक्रिय बनाना चाहते हैं और इस कॉरिडोर के सक्रिय हो जाने से दोनों देशों के आर्थिक विकास में ध्यानयोग्य मदद मिलेगी।

इसी प्रकार रश्त- आस्तारा रेल मार्ग के आरंभ हो जाने से बंदरअब्बास और ईरान की चाबहार बंदरगाह तक रूस की पहुंच आसान हो जायेगी और यह व्यापारिक मार्ग लगभग 3 हज़ार किलोमीटर लंबा है और यह मार्ग दोनों देशों को इस योग्य बना देगा कि वे अपने उत्पादों को ज़मीनी और समुद्री मार्ग से एशिया के बहुत से खरीदारों तक पहुंचा सकते हैं। दूसरे शब्दों में ईरान और रूस को जहां समान व संयुक्त चुनौतियों का सामना है वहीं बहुत से क्षेत्रों में दोनों एक दूसरे से सहयोग करके बहुत सी चुनौतियों का मुकाबला कर सकते हैं।

ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली खामनेई के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि जिन देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना है वे एक दूसरे से सहयोग करके उन्हें निष्क्रिय व प्रभावहीन बना सकते हैं।  MM

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