सीरिया पर इस्राईल के हमले के कारण
सीरिया की संंप्रभुता का उल्लंघन करते हुए अवैध ज़ायोनी शासन ने 31 मार्च को दमिश्क़ के कुछ क्षेत्रों पर हमले किये।
अवैध ज़ायोनी शासन के इन हमलों की निंदा करते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनआनी ने इसके कारणों की समीक्षा की है।
उन्होंने कहा कि पहला और प्रमुख कारण यह है कि विश्व समुदाय विशेषकर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने इस बारे में चुप्पी साध ली है। ज़ायोनी शासन ने हालिया दिनों में सीरिया पर हमले नहीं किये हैं बल्कि वह पिछले कुछ समय से यह काम करता आ रहा है। इन हमलों के दौरान सीरिया के कई लोग शहीद और घायल हुए हैं। सीरिया, संयुक्त राष्ट्रसंघ का एक सदस्य है किंतु उसने इस देश पर होने वाले हमलों को रुकवाने के लिए अबतक कोई भी उल्लेखनीय काम नहीं किया है।
नासिर कनआनी का कहना था कि सीरिया के आवासीय क्षेत्रों और वहां के हवाई अड्ड़ों पर ज़ायोनी शासन की सैन्य कार्यवाही पर राष्ट्रसंघ की ओर से कोई भी गंभीर प्रतिक्रया सामने नहीं आई। यह वास्तव में एक विडंबना है कि राष्ट्रसंघ के एक सदस्य देश के विरुद्ध सैन्य कार्यवाही की जाती है और उसपर सब मौन धारण कर लेते हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार इस प्रकार का काम अवैध ज़ायोनी शासन के दुस्साहसी होने का कारण बना है।
ज़ायोनी शासन को यह बात समझ में आ गई है कि सीरिया के विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही के कारण अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होगी। नासिर कनआनी के अनुसार इन हमलों का एक अन्य कारण अवैध ज़ायोनी शासन की वर्तमान अशांत स्थति है। नेतनयाहू ने जब से ज़ायोनी शासन की सत्ता संभालने के बाद अतिवादी मंत्रीमण्डल बनाया है उसके बाद से इस्राईल के भीतर नेतनयाहू विरोधी प्रदर्शनों की बाढ़ सी आ गई है। नेतनयाहू और उनके मंत्रीमण्डल का विरोध स्वयं ज़ायोनी शासन में इतना अधिक बढ चुका है कि अब वहां के कई अधिकारी इस्राईल के विनाश की बात कहने लगे हैं। इसका मुख्य कारण वहां पर पाए जाने वाले आंतरिक मतभेद हैं। हालांकि इस्राईल में पिछले कुछ वर्षों सें अशांति पाई जाती है किंतु हालिया अशांति ने वहां की शासन व्यवस्था के बाक़ी रहने पर ही सवाल लगा दिये हैं।
इस संदर्भ में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि अपनी इन समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ज़ायोनी शासन सीरिया पर हमले जैसी कार्यवाही कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कनआनी के अनुसार सीरिया पर इस्राईल के हमलों का एक अन्य कारण यह है कि हालिया कुछ महीनों के दौरान अरब देशों ने सीरिया का रुख़ किया है। सऊदी अरब, क़तर और यूएई जैसे देश अब सीरिया से बहुत निकट होते जा रहे हैं। यह बात अवैध ज़ायोनी शासन को हज़्म नहीं हो पा रही है क्योंकि वह क्षेत्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सीरिया के अलग-थलग रहने का इच्छुक है जबकि हालात इसके विपरीत होते जा रहे हैं।
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