सऊदी अरब में ईरान का दूतावास खुल गया
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ईरान और सऊदी अरब के बीच संबंधों के टूटने के लगभग 7 साल बाद रियाज़ में स्थित ईरानी दूतावास को दोबारा खोल दिया गया है।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Apr १३, २०२३ १०:२२ Asia/Kolkata

ईरान और सऊदी अरब के बीच संबंधों के टूटने के लगभग 7 साल बाद रियाज़ में स्थित ईरानी दूतावास को दोबारा खोल दिया गया है।

ईरान का तकनीकी प्रतिनिधिमंडल ईरान और सऊदी अरब के बीच संबंधों की बहाली के समझौते के तहत बुधवार को रियाज़ पहुंचा जहां सऊदी अधिकारियों ने उसका स्वागत किया। ईरानी प्रतिनिधिमंडल में दो ग्रुप शामिल हैं जो रियाज़ में ईरानी दूतावास और जेद्दा में वाणिज्य दूतावास और इस्लामिक सहयोग संगठन में ईरान के स्थायी कार्यालय को बहाल करने के लिए आवश्यक तकनीकी उपाय अंजाम देंगे।

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय का प्रतिनिधिमंडल भी शनिवार को तेहरान पहुंचा था। सऊदी वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन करने के लिए प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को मशहद के लिए रवाना हुआ।

द्विपक्षीय संबंधों को बहाल करने के लिए ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौते को पश्चिम एशिया में सबसे महत्वपूर्ण हालिया राजनीतिक और राजनयिक घटना माना जाता है तथा क्षेत्रीय विकास पर इसके सकारात्मक प्रभाव के कारण पड़ोसी देशों द्वारा इसका भरपूर स्वागत किया गया है। यह संबंध, दो प्रमुख तेल शक्तियों रूप में ईरान और सऊदी अरब के साथ दो महत्वपूर्ण इस्लामी देशों के बीच आधुनिक राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को आकार देने के अलावा, क्षेत्र में आर्थिक फ़ायदा पहुंचाने के साथ सीरिया और यमन जैसे देशों सहित क्षेत्रीय शांति व स्थिरता और सुरक्षा में मददगार भी बन सकता है।

दूसरे शब्दों में बीजिंग में तेहरान और रियाज़ के बीच समझौता, अमेरिकी और यूरोपीय तंत्र का सहारा लिए बिना पश्चिम एशिया में दूसरे तनावपूर्ण मामलों को सुलझाने के लिए एक मिसाल बन सकता है। इसका मतलब यह होगा कि पश्चिम एशिया में चीन की छवि और स्थिति में और भी मज़बूती पैदा होगी।

उदाहरण स्वरूप सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार अल-असद को अरब लीग में आमंत्रित करने के अपने फ़ैसले का एलान किया जबकि वाशिंगटन बश्शार अल-असद के साथ संबंधों को किसी भी तरह से बहाल करने का विरोध करता है।

इसके साथ ही ईदुल-फित्र से पहले सऊदी अरब और यमन के बीच एक स्थायी युद्धविराम समझौते के लिए उम्मीदें बढ़ गई हैं जो इस क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण संकटों में से एक को समाप्त कर देगा।

ईरान को क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग करने के विषय को नाकाम बनाना भी ईरान और सऊदी अरब के बीच संबंधों को पुनर्जीवित करने के रणनीतिक परिणामों में से एक है क्योंकि ईरान को राजनीतिक रूप से अलग थल करने की कोशिश हमेशा से रही है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान और सऊदी अरब के बीच संबंधों की पुन: स्थापना एक बार फिर ईरान की अच्छी-पड़ोसी नीति का चिन्ह है और अपने पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध ईरान के लक्ष्यों में से एक है। (AK)

 

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