वरिष्ठ नेता की नज़र में नई वैश्विक व्यवस्था
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4 अप्रैल को इस्लामी गणतंत्र ईरान के उच्च अधिकारियों के साथ एक मुलाक़ात में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए थे, जिनमें से एक वैश्विक व्यवस्था में होने वाला बदलाव है।
(last modified 2023-04-18T03:43:09+00:00 )
Apr १८, २०२३ ०९:१३ Asia/Kolkata
  • वरिष्ठ नेता की नज़र में नई वैश्विक व्यवस्था

4 अप्रैल को इस्लामी गणतंत्र ईरान के उच्च अधिकारियों के साथ एक मुलाक़ात में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए थे, जिनमें से एक वैश्विक व्यवस्था में होने वाला बदलाव है।

वरिष्ठ नेता का कहना था कि वैश्विक व्यवस्था तेज़ी से बदल रही है और यह बदलाव इस्लमी गणतंत्र ईरान के दुश्मनों को कमज़ोर होने के कारण बन रहा है। वरिष्ठ नेता का कहना थाः इस अवसर से लाभ उठाने के लिए सक्रिय विदेश नीति होनी चाहिए। दुनिया में ईरान के महत्वपूर्ण विरोधियों में से एक अमरीका है। साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि ओबामा के दौर का अमरीका, बुश के दौर के अमरीका, ओबामा के दौर का अमरीका, ट्रम्प के दौर के अमरीका और अब बाइडन के दौर का अमरीका ट्रम्प के दौर के अमरीका से भी कमज़ोर है।

इससे पहले भी वरिष्ठ नेता अपने भाषणों में बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था का उल्लेख कर चुके हैं। उनका मानना है कि वैश्विक व्यवस्था बदल रही है और दुनिया में एक नई व्यवस्था जन्म ले रही है। इस बदलाव की निशानियों को साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि अभी नई व्यवस्था के बारे में कुछ कहना जल्दबाज़ी होगा, लेकिन इसके कुछ चिन्ह देखे जा सकते हैं।

इसका पहला चिन्ह, दिन ब दिन दुनिया में अमरीका का अलग-थलग पड़ना है। 1990 की दहाई में बुश ने दावा किया था कि आज दुनिया में एकमात्र महा शक्ति अमरीका है, लेकिन व्यवहारिक रूप से अमरीका, दुनिया में कमज़ोर और अलग-थलग पड़ता जा रहा है। दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था को साकार करने और अमरीका के साथ प्रतिस्पर्धा करने वाली दो अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों रूस और चीन की इस उभरती हुई नई वैश्विक व्यवस्था में अहम भूमिका है।

इसी के साथ साथ अमरीका आर्थिक रूप से भी टूट रहा है और सैन्य स्तर पर भी कमज़ोर हो रहा है। आंतरिक मतभेदों और ध्रुवीकरण ने भी इसे कमज़ोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस संदर्भ में वरिष्ठ नेता का कहना हैः अमरीका, दुनिया से अपना बोरिया बिस्तरा बांधने पर मजबूर हो जाएगा। आज दुनिया भर में अमरीका की सैन्य छावनियां हैं, हमारे इलाक़े में, यूरोप में, एशिया में ऐसी छावनियां हैं, जहां बड़ी संख्या में सैनिक हैं। अमरीका इन छावनियों का ख़र्चा भी उन बेचारे देशों से लेता है, जहां वह स्थित हैं। बेचारे उन्हें ख़र्चा भुगतना पड़ता है, जबकि अमरीकी ऐश करते हैं, लेकिन अब यह सब ख़त्म होने वाला है, अमरीका को अपना बोरिया बिस्तरा उठाना पड़ेगा। नई वैश्विक व्यवस्था की यह सबसे महत्वपूर्ण निशानी है।