नकबा डे, इस्राईल को उसके अपराधों की सज़ा मिलनी चाहिए, ईरान
ईरान ने फ़िलिस्तीन की पीड़ित जनता के साथ अपनी एकजुटता दर्शाते हुए कहा है कि ग़ज्ज़ा पट्टी की घेराबंदी जैसे अमानवीय अपराधों के लिए इस्राईल को दंडित किया जाना चाहिए।
नकबा डे की 75वीं वर्षगांठ पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें गत 75 वर्षों में ज़ायोनी शासन के अपराधों के लिए उसे सज़ा देने की अपील की गई।
ग़ौरतलब है कि ज़ायोनी शासन के अवैध गठन और फ़िलिस्तीनियों को उनके घर-बार से उजाड़ने की याद में हर वर्ष 15 मई को नकबा डे के रूप में मनाया जाता है।
7 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा फ़िलिस्तीनियो को उनके घरों और बस्तियों से जबरन बाहर निकालकर 15 मई 1948 को फ़िलिस्तीन में अवैध ज़ायोनी शासन के गठन की घोषणा की गई थी।
इस अवैध शासन के गठन के बाद से फ़िलिस्तीनियों के अंतहीन दुखों का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह आज तक जारी है, हालांकि फ़िलिस्तीनियों ने हार नहीं मानी है और वह आज भी अपनी सरज़मीन और अपने मूल अधिकारों के लिए प्रतिरोध कर रहे हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में पीड़ित फ़िलिस्तीनी जनता के समर्थन और इस्राईल के ख़िलाफ़ प्रतिरोध जारी रखने पर बल दिया है, और इसे फ़िलिस्तीनियों का क़ानूनी अधिकार बताया है।
बयान में कहा गया है कि पिछले तीन दशकों के दौरान, फ़िलिस्तीनी मुद्दे के समाधान में जितने भी राजनीतिक समाधान खोजे गए, वह सभी नाकाम रहे हैं, क्योंकि इन समाधानों में कभी भी समस्या की जड़ पर बात नहीं की गई, बल्कि ज़ायोनी शासन को मज़बूती प्रदान करने की साज़िश रची गई। msm