ईरान में अफ़ग़ान शरणार्थी किस हाल में रहते हैं?
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पलायन व प्रवासन के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने घोषणा की कि पिछले दो वर्षों में अफ़गान शरणार्थियों का पहला और सबसे अहम गंतव्य इस्लामी गणतंत्र ईरान था।
(last modified 2023-06-11T05:07:52+00:00 )
Jun ११, २०२३ १०:०८ Asia/Kolkata

पलायन व प्रवासन के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने घोषणा की कि पिछले दो वर्षों में अफ़गान शरणार्थियों का पहला और सबसे अहम गंतव्य इस्लामी गणतंत्र ईरान था।

इस संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 से 2022 के बीच तालेबान के सत्ता में आने पर 36 लाख अफ़ग़ान नागरिक ईरान समेत दूसरे देशों की ओर पलायन कर गये।

इनमें 70 प्रतिशत यानी 24 लाख और 89 हज़ार लोग ईरान आ गये जबकि 18 प्रतिशत के बराबर यानी 6 लाख 32 हजार लोग पाकिस्तान चले गए हैं और 11 प्रतिशत के बराबर यानी 3 लाख 87 हजार लोग तुर्की और यूरोप की ओर और अन्य लगभग 63 हजार लोग अन्य देशों की ओर पलायन कर गये।

इसी मध्य ईरान की ज़मीनी सच्चाई यह बताती हैं कि पिछले दो वर्षों में ईरान में आने वाले अफ़ग़ान प्रवासियों की संख्या इससे कहीं अधिक है।

इसका मतलब यह है कि अफ़ग़ानिस्तान के लोग ईरान को अपनी मातृभूमि की तरह मानते हैं और ईरानी जनता और सरकार के अफ़ग़ान प्रवासियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार के कारण, यह लोग ईरान में रहने के अधिक इच्छुक हैं।

राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ अली खेज़ाई कहते हैं कि ईरान और अफ़ग़रनिस्तान समान सभ्यता वाले क्षेत्र में हैं और ज़्यादा समय नहीं गुज़रा कि ब्रिटिश साम्राज्यवादी नीतियों के प्रभाव में अफ़ग़ानिस्तान ईरान से अलग हो गया।

यही वजह है कि अफ़ग़ान जनता ईरान में अधिक आराम महसूस करती हैं जबकि उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाता है जो ख़ुद उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण बात है।

हक़ीक़त यह है कि पिछले चार दशकों में अफ़ग़ानिस्तान के जो पलायनकर्ता ईरान आए हैं वे कभी भी शिविरों में नहीं रहे हैं और हमेशा लोगों के साथ शहरों में रहे हैं और विभिन्न नौकरियों में उन्होंने स्थानीय लोगों का साथ दिया और उनके साथ काम किया है और कई व्यवसायों में महारत भी हासिल कर ली और जब यह लोग अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए अपने देश लौटेंगे तो बहुत ही लाभदायक साबित होंगे।  

अफ़ग़ान प्रवासियों के साथ ईरानी सरकार का बर्ताव इस्लामी भाईचारे और अच्छे पड़ोसी पर आधारित है और तेहरान ने इस विषय पर हमेशा ही ध्यान दिया है चाहे अफ़ग़ानिस्तान में किसी की भी सरकार हो।

राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सैयद ईसा हुसैनी मज़ारी इस बारे में कहते हैं कि ईरानी जनता और सरकार के अफगानिस्तान के लोगों के साथ हमेशा से अच्छे संबंध रहे हैं और यह मुद्दा किसी भी चीज़ से अधिक सभ्यता, संस्कृति और धर्म की समानता के कारण है। (AK)

 

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