अब विनाश की कगार पर पहुंच चुका है ज़ायोनी शासनः सर्वोच्च नेता
वरिष्ठ नेता कहते हैं कि पिछले सात दकशों की तुलना में अब ज़ायोनी शासन बहुत बदल चुका है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने फ़िलिस्तीन के जेहादे इस्लामी प्रतिरोध संगठन के महासचिव और उनके साथ आए प्रतिनिधिमण्डल के साथ मुलाक़ात में ज़ायोनी शासन की स्थति को सत्तर साल पहले की अपेक्षा बहुत बदला हुआ बताया है।
उन्होंने कहा कि दुश्मन अब रक्षात्मक पोज़ीशन में आ गया है जिससे ज्ञात होता है कि जेहादे इस्लामी ने सही मार्ग का चयन किया जिसपर वह होशियारी के साथ बढ़ रहा है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने बुधवार को जेहादे इस्लामी के शिष्टमण्डल के साथ भेंट में कहा कि इस संगठन और अन्य फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध संगठनों ने ज़ायोनी शासन के विरुद्ध संघर्ष के मुख्य कारण को समझ लिया है। उन्होंने कहा कि ग़ज्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों के बढ़ते वर्चस्व के कारण ज़ायोनी अब घुटनों पर आ गए हैं। वरिष्ठ नेता कहते हैं कि इस रास्ते को आगे भी जारी रखा जाए।
सर्वोच्च नेता के बयान से यह बात साफ हो जाती है कि दशकों तक फ़िलिस्तीनियों पर अत्याचार करने वाले ज़ायोनी शासन का पतन अब बहुत ही स्पष्ट दिखाई देने लगा है। वर्तमान समय में अवैध ज़ायोनी शासन के भीतर जारी आंतरिक कलह और दूसरी ओर फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधकर्ता गुटों की बढ़ी सैन्य शक्ति और समर्थन ने इस शासन के विघटन की आशा को बढ़ा दिया है।
अवैध ज़ायोनी शासन के भीतर वहां के प्रधानमंत्री नेतनयाहू की न्यायिक सुधार योजना के विरुद्ध हालिया महीनों के दौरान होने वाले व्यापक विरोध प्रदर्शन, ज़ायोनी संसद क्नैसेट में बढ़ते मतभेद, एक संगठित मंत्रीमण्डल के गठन में विफलता, शासकों के प्रति वहां लोगों में अविश्वास, ज़ायोनियों का उल्टा पलायन और इसी प्रकार की बहुत सी बातों ने ज़ायोनी शासन को भीतर से बहुत ही कमज़ोर कर दिया है। क्षेत्रीय और अन्तर्राष्ट्री स्तर पर भी ज़ायोनी शासन के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं।
दशकों तक ज़ायोनी शासन और उसका समर्थन करने वाले देशों के अथक प्रयासों के बावजूद वर्तमान समय में अन्तर्राष्ट्री स्तर पर ज़ायोनी शासन अधिक अविश्वसनीय हो गया है। फ़िलिस्तीनियों के समर्थन और ज़ायोनियों के विरोध में दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली व्यापक रैलियां, इसी वास्तविकता को साबित करती हैं। क्षेत्र में होने वाले परिवर्तन भी अब ज़ायोनी शासन के हित में नहीं हो रहे हैं क्योंकि अमरीकी प्रभाव अब कम होता जा रहा है।
महत्वपूर्ण बिंदु जिसकी ओर इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने ध्यान आकृष्ट करवाया वह फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधकर्ता गुटों का बढ़ता हुआ प्रभाव है। इस समय पूर्व की तुलना में अधिक सशक्त और अधिक एकजुट हैं। हालिया दिनों में ज़ायोनियों के विरुद्ध पांच दिवसीय युद्ध में जेहादे इस्लामी की सफलता इसी बात को सिद्ध करती है।
इस संदर्भ में आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि ग़ज़्ज़ा के हालिया युद्ध में जेहादे इस्लामी ने बहुत अच्छा काम किया। पिछले 70 वर्षों की तुलना में इस समय ज़ायोनी शासन की हालत बहुत बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि वास्तव में ज़ायोनी नेताओं को इस बात को लेकर चिंतित होने का स्वभाविक अधिकार है कि इस अवैध शासन की 80वीं वर्षगांठ को वे नहीं देख पाएंगे।
हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए
हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए