सऊदी अरब के विदेशमंत्री ईरान के दौरे पर
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सऊदी अरब के विदेश मंत्री, ईरान के विदेश मंत्री के निमंत्रण पर शनिवार को तेहरान पहुंचे और उन्होंने ईरान के विदेशमंत्री और राष्ट्रपति से मुलाक़ात की।
(last modified 2023-06-18T05:43:07+00:00 )
Jun १८, २०२३ ११:०९ Asia/Kolkata

सऊदी अरब के विदेश मंत्री, ईरान के विदेश मंत्री के निमंत्रण पर शनिवार को तेहरान पहुंचे और उन्होंने ईरान के विदेशमंत्री और राष्ट्रपति से मुलाक़ात की।

ईरान और सऊदी अरब ने 10 मार्च को बीजिंग में राजनयिक संबंधों को बहाल करने और दो महीने के भीतर दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की थी।

उसके बाद ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फरहान एक बार बीजिंग में और फिर दूसरी बार केप टाउन में मुलाक़ात की थी और तभी सऊदी विदेश मंत्री ने बताया था कि वह जल्द ही तेहरान का दौरा करेंगे।

इस दौरान, ईरान और सऊदी अरब दोनों देशों में से हर एक में क्षेत्रीय और बाहरी क्षेत्रीय समीकरणों में बड़े बदलाव हुए हैं और तब से रियाज़ ने ईरान के सहयोगी के रूप में सीरिया के साथ अपने संबंधों को फिर से बहाल कर लिया और यमनी सरकार के साथ बातचीत के अपने प्रयासों को तेज़ कर दिया है।

इसी के साथ  क्षेत्र के अरब देशों ने ईरान के साथ संबंध सुधारने की इच्छा भी ज़ाहिर कर दी और अब इराक़ और ओमान जैसे विभिन्न चैनलों के माध्यम से मिस्र और बहरैन के ईरान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास हो रहे हें।  

क्षेत्रीय मुद्दों के विशेषज्ञ हसन हनीज़ादेह कहते हैं कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सात साल के तनाव के बाद सऊदी विदेश मंत्री की तेहरान यात्रा, क्षेत्रीय एकजुटता के लिए सऊदी अरब के नए दृष्टिकोण का इशारा है।

सऊदी अरब को पिछले वर्षों के दौरान विशेषकर ईरान के साथ तनाव के समय बहुत ज़्यादा इंसानी और वित्तीय नुक़सान उठाना पड़ा है।  

यमन युद्ध में सऊदी अरब ने 350 अरब डॉलर ख़र्च किए जबकि सीरिया संकट में उसने आतंकवादी गुटों को 80 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की है हालांकि यह वित्तीय सहायता अमेरिका के आदेश पर अंजाम दी गयी थी।

यह स्पष्ट है कि दो प्रमुख तेल शक्तियों और दो महत्वपूर्ण मुस्लिम देशों के रूप में ईरान और सऊदी अरब के बीच संबंधों में सुधार, दोनों देशों के बीच नई राजनीतिक और आर्थिक सहमति बनने के अलावा  क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के विस्तार का भी कारण बन सकता है ख़ास तौर पर क्षेत्र और सीरिया तथा यमन जैसे देशों में संकट के समाधान के लिए, भूमि प्रशस्त हो सकती है।

सऊदी अरब सहित ईरान और क्षेत्र के अरब देशों के बीच संबंधों की बहाली भी ईरान को अलग-थलग करने में अमेरिका और ज़ायोनी शासन की नीतियों की विफलता माना जाता है। ईरान का राजनीतिक अलगाव अमेरिका और ज़ायोनी शासन की ईरानी विरोधी रणनीतियों में से एक है जिसे हालिया वर्षों में क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सख्ती से आगे बढ़ाया गया है।

यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने पवित्र नगर मशहद में अपने नवरोज़ के भाषण में इसका उल्लेख किया और कहा कि पश्चिम ने ईरान को अलग-थलग करने के लिए दबाव डाला, लेकिन परिणाम उसके विपरीत निकला। (AK)

 

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