ईदुल अज़हा का त्योहार, पूरी दुनिया के मुसलमानों को बधाई
इस्लामी गणतंत्र ईरान, भारत और पाकिस्तान सहित दुनिया के अधिकतर देशों में गुरुवार को ईदुल अज़हा भरपूर श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है जबकि सऊदी अरब, क़तर, संयुक्त अरब इमारात और फ़िलिस्तीन सहित कई अरब देशों में ईदुल अज़हा बुधवार को मनाई गयी।
इस्लामी गणतंत्र ईरान में राजधानी तेहरान तथा अन्य नगरों में ईदुल अज़हा की नमाज़ अदा की गई जिनमें भारी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। तेहरान विश्वविद्यालय में में ईदुल अज़हा की केन्द्रीय नमाज़ अदा की गयी जिसमें लाखों की संख्या में ईरान की मुस्लिम और एकेश्वरवादी जनता ने भाग लिया।
इस अवसर पर नमाज़ियों ने इस्लाम और मुसलमानों की सफलता के लिए दुआएं कीं। लोग ईदुल अज़हा के अवसर पर क़ुरबानी भी कर रहे हैं और क़ुरबानी का गोश्त ज़रुरतमंदों और रिश्तेदारों में बांटा जा रहा है। कल्याणकारी संस्थाओं को भी गोश्त पहुंचाया जा रहा है।
इराक़, भारत और पाकिस्तान के साथ दुनिया के अन्य देशों में भी ईदुल अज़हा धार्मिक श्रद्धा और हर्षोल्लाहस के साथ मनाई जा रही है। लोग नए कपड़ों में ईद की नमाज़ अदा करने गए और फिर जानवरों की क़ुरबानी का सिलसिला शुरू हआ जो लगातार जारी है। पाकिस्तान के सभी छोटे बड़े शहरों और क़स्बों में ईद की नमाज़ अदा की गयी। उधर भारत में छोटे बड़े शहरों और क़स्बों में पारंपरिक ढंग से ईदुल अज़हा मनाई जा रही है।
ईद मिलन की परम्परा के अनुसार लोग एक दूसरे के घर जा रहे हैं और एक दूसरे को ईद की बधाइयां दे रहे हैं।
इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी,विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान और संसद सभापति मुहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़ ने दुनिया के मुसलमानों को ईदुल अज़हा की बधाई दी है।
ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई कहते हैं कि ईदे कुरबान में एक बहुत बड़ा ईश्वरीय राज़ पोशीदा है। वह ईश्वर के चुने हुए पैग़म्बर द्वारा त्याग है। अपनी जान कुर्बान करने से बढ़कर अपने प्राणप्रिय को कुर्बान करना है। वह अपने हाथों से अपने प्राणप्रिय को कुर्बान कर रहे थे। यह त्याग उन मोमिनों के लिए आदर्श है जो सच्चाई और वास्तविकता के मार्ग को तय करना चाहते हैं, यह कुर्बानी सफलता और ईश्वरीय परीक्षा की प्रतीक है। ईश्वरीय परीक्षा एक प्रकार से बंदगी की परीक्षा है।
परीक्षा में हमेशा एक त्याग व परित्याग होता है। कभी जान या माल का त्याग होता है, कभी उस बात से त्याग देना पड़ता है, नज़रअंदाज़ करना पड़ता है जिसे कोई कहे होता है अगर इंसान त्याग कर सकता है तो करके अपने गंतव्य तक पहुंचता है परंतु अगर अपनी आंतरिक इच्छाओं पर नियंत्रण न कर पाने की वजह से त्याग नहीं कर पाता है तो रह जाता है, परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है। वास्तव में परीक्षा गंतव्य की ओर एक कदम है। हमारा और आपका जो इम्तेहान होगा उसका अर्थ यह है कि अगर हम इसमें सफल हो गये तो जीवन के नये चरण में पहुंच जायेंगे।
इस संबंध में एक राष्ट्र या एक व्यक्ति में कोई अंतर नहीं है। उस दिन परीक्षा में पास होने की वजह से ईश्वर ने हज़रत इब्राहीम की प्रशंसा की और एक बड़ा भेड़ा भेजा ताकि वह अपने बेटे के स्थान पर उसकी कुर्बानी करें और यह हज संस्कार में आगामी पीढ़ियों के लिए एक परंपरा हो गयी। ईश्वर ने हज़रत इब्राहीम के नाम को भावी पीढ़ियों के लिए अमर कर दिया, उनके अमल को स्वीकार किया और यह बहुत बड़ी खुशखबरी व सफलता है जिसे अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम को दी। (AK)
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