एमकेओ आतंकवादी गुट जो घर का रहा न घाट का
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मुजाहिदीने ख़ल्क संगठन या एमकेओ दुनिया का एक ऐसा ख़ूंख़ार आतंकवादी संगठन है, जिसने 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद, बड़े पैमाने पर देश के ख़िलाफ़ जंग छेड़ दी और ईरानी नागरिकों और सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाया।
(last modified 2023-07-02T04:14:38+00:00 )
Jul ०२, २०२३ ०९:४१ Asia/Kolkata
  • एमकेओ आतंकवादी गुट जो घर का रहा न घाट का

मुजाहिदीने ख़ल्क संगठन या एमकेओ दुनिया का एक ऐसा ख़ूंख़ार आतंकवादी संगठन है, जिसने 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद, बड़े पैमाने पर देश के ख़िलाफ़ जंग छेड़ दी और ईरानी नागरिकों और सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाया।

इस आतकंवादी गुट ने आम नागरिकों और अधिकारियों को निशानाब नाकर सैकड़ों आतंकवादी हमले किए हैं। पिछले चार दशकों के दौरान, आतंकवादी गुट एमकेओ के हमलों में 17,000  ईरानी नागरिक शहीद हो चुके हैं, जबकि लगभग 12000 लोग घायल हुए हैं।

इराक़ के पूर्व तानाशाह सद्दाम ने इस गुट से जुड़े आतंकवादियों को देश में शरण दी और बढ़चढ़कर उनका समर्थन किया। इसी वजह से एमकेओ के आतंकवादियों ने ईरान-इराक़ युद्ध के दौरान, सद्दाम के सैनिकों के साथ मिलकर ईरान पर हमले किए।

यूरोपीय संघ, कनाडा, अमरीका और जापान ने पहले इस गुट को आतंकवादी गुटों की सूची में शामिल किया था, लेकिन 2012 में अमरीका ने उसका नाम काली सूची से हटा दिया, बाद में जिसका अनुसरण यूरोपीय संघ ने भी किया।

सद्दाम के पतन के बाद इराक़ के पूर्व प्रधान मंत्री नूरी अल-मालेकी की सरकार ने इस गुट को देश से निकाल दिया, जिसके बाद यूरोपीय देशों के दबाव में अल्बानिया ने उसे अपने यहां जगह दी।

हालांकि अल्बानियाई पुलिस ने विदेशी संस्थानों के ख़िलाफ़ आतंकवादी और साइबर हमलों के आरोप में 20 जून को एमकेओ के एक शिविर पर छापा मारा। अल्बानियाई अधिकारियों ने आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े 150 कंप्यूटर उपकरणों को ज़ब्त कर लिया। अशरफ-3 नामक एक शिविर में सुरक्षा बलों के साथ झड़प में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और दर्जनों अन्य घायल हो गए।

सूत्रों का कहना है कि छापे के दौरान मारा गया एमकेओ का सदस्य अब्दुलवहाब फ़रजी, आतंकवादी गुट का एक हाई-प्रोफ़ाइल कमांडर था। उसके बारे में कहा जाता है कि वह सैन्य इंजीनियरिंग अभियानों का विशेषज्ञ था।

अल्बानियाई पुलिस की इस कार्यवाही से ऐसा लगता है कि अब इस देश ने भी इस आतंकवादु गुट से जान छुड़ाने का मन बना लिया है। यही वजह है कि इस देश के प्रधान मंत्री ईदी रामा का कहना है कि अगर एमकेओ ने ईरान के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए अल्बानियाई धरती का इस्तेमाल किया तो उसे यह देश छोड़ना होगा।

एमकेओ के शिविर पर छापे की कार्यवाही के कुछ दिन बाद, पुलिस ने शिविर के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया है और यहां आने-जाने वालों पर नज़र रखी जा रही है सभी वाहनों को चेक किया जा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने ज़ोर देकर कहा है कि ईरान विरोधी आतंकवादी गुट, हमेशा अपने मेज़बान देशों की सुरक्षा के लिए ख़तरा उत्पन्न करता है।