ईरान को अशांत करने की फिर कोशिश, बड़े हमले की योजना नाकाम...
शीराज़ में स्थित शाह चेराग़ के मज़ार पर एक बार फिर आतंकी हमला हुआ जिसमें एक श्रद्धालु शहीद और 8 अन्य घायल हो गये। शहीद होने वाला 69 वर्षीय मज़ार का सेवक था। घायलों में कुछ हालात चिंताजनक है जिससे शहीद होने वालों की संख्या में वृद्धि की आशंका है।
रिपोर्ट में बताया गया कि रविवार की शाम लोग शाम की नमाज़ अदा करने के लिए मज़ार की ओर जा रहे थे कि अचानक एक आतंकी एके-47 लेकर मज़ार के प्रांगढ़ में घुस गया और अंधाधुंध गोलिया चलाने लगा। बताया जाता है कि हमलावर दो लोग थे। सुरक्षाकर्मियों ने सही समय पर कार्यवाही करते हुए हमलावर को ज़िंदा गिरफ़्तार कर लिया।

सूत्रों का कहना है कि हमलावर के पास एक एके-47 रायफ़ल और 8 मैगज़ीन तथा 240 गोलियां थीं लेकिन जनता के प्रतिरोध के सामने वह केवल 11 राउंड गोलियां ही चला सका और गिरफ़्तार हो गया।
बीबीसी ने ब्रेकिंग न्यूज़ में बताया कि आतंकवादी गुट दाइश ने हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार कर ली। इससे पहले भी इसी मज़ार पर कुछ महीने पहले ही हमला हुआ था जिसमें 13 लोग शहीद हुए थे।

कुछ सूत्रों ने बताया है कि हमलावर मूल रूप से ताजिक है। सूत्रों का कहना है कि हमलावर का नाम एस. असलमयार है और वह अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शां प्रांत का निवास और मूल रूप से ताजिक है।
आधिकारिक रूप से अभी तक इस विषय की पुष्टि नहीं हो सकी है। दक्षिणी प्रांत फ़ार्स के एटार्नी जनरल सैयद काज़िम मूसवी ने शाहचेराग़ के मज़ार पर आतंकी हमले में सहयोग करने के संदेह में 4 लोगों की गिरफ्तारी की सूचना दी है।

उनका कहना था कि मुख्य आतंकवादी जिसने मज़ार में गोलीबारी शुरू कर दी थी और उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था, उसे जांचकर्ताओं के हवाले कर दिया गया और उससे पूछताछ जारी है।
उनका कहना था कि सुरक्षाकर्मियों ने सही समय पर कार्यवाही की और आतंकवादी को अधिक तबाही फैलाने नहीं दिया। उनका कहना था कि हमलावर बड़ी योजना के साथ आया था लेकिन जैसे ही सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्यवाही शुरु हुई उसने बौखलाकर सुरक्षाकर्मियों के कमरों, चेकपोस्ट, तीर्थयात्रियों और सेवकों पर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरु कर दी।

सैयद काज़िम मूसवी का कहना था कि यह कायराना हरकत थी जिसमें हमलावर बदला लेना चाहते थे लेकिन मैं समझता हूं कि यह पूरी तरह से नाकाम आतंकी कार्यवाही थी।
आतंकवादियों को नकेल करने वाला ईरान हमेशा से अमरीका और इस्राईल को खटकता रहा है और उनकी यह कोशिश रही है कि ईरान को किसी भी तरह से अशांत कर दिया जाए और इस योजना को व्यवहारिक बनाने के लिए इस्राईल और अमरीका ने बहुत ज़्यादा पैसे ख़र्च किए और ईरान में कई आतंकी कार्यवाहियां भी अंजाम दीं लेकिन ईरान की जनता हमेशा से ही दुश्मन की साज़िशों पर प्रति सावधान रहती है और उसने हमेशा से सरकार का साथ दिया जिसकी वजह से आज तक दुश्मनों की सारी कोशिशें नाकाम रही हैं। (AK)
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