रक्षा शक्ति में ईरान का आज दुनिया में क्या स्थान है?
अभी ज़्यादा समय नहीं गुज़रा है कि जब अमरीका और पश्चिमी देशों के दबाव में दुनिया भर के दूसरे देश, ईरान को हथियार और ज़रूरी सैन्य उपकरण देने के तैयार नहीं थे। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है।
दुनिया भर की महा शक्तियों के दबाव में विश्व भर के देश ईरान को किसी भी क़ीमत पर मिसाइल वायु रक्षा प्रणाली जैसे रक्षा उपकरण देने को तैयार नहीं थे, लेकिन आज दुनिया की कई महा शक्तियां, इसी ईरान से आधुनिक ड्रोन और सैन्य उपकरण ख़रीदना चाहती हैं।
अन्य देशों में ईरान के सैन्य उपकरणों और हथियारों के निर्यात में वृद्धि का उल्लेख करते हुए, ईरानी उप रक्षा मंत्री ने कहा है कि ईरान अतीत में सैन्य हथियारों का आयातक था, लेकिन अब यह रक्षा उद्योग के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में से एक है।
जनरल रज़ा तलाइनीक ने बताया कि 19 अगस्त को 70 साल पहले अमरीका और इंग्लैंड के संयुक्त प्रयासों से हुए अपमानजनक तख्तापलट की वर्षगांठ है। यह घटना 70 साल से ईरान में पश्चिम के अत्याचारों के इतिहास का एक दस्तावेज़ है।
उन्होंने कहा कि 19 अगस्त का तख्तापलट, एक ऐतिहासिक अनुभव था, जिसके बाद ईरान के क्रांतिकारियों ने 45 साल पहले अत्याचारी शक्तियों की जड़ें खोद दीं और इस देश में अहंकार के वर्चस्व की ज़मीन सूख गई।
उन्होंने कहा कि इस दौरान हमारे सामने जो महत्वपूर्ण मुद्दे थे, उनमें से एक रक्षा का मुद्दा था, लेकिन इमाम ख़ुमैनी और सर्वोच्च नेता के नेतृत्व में, ईरानी राष्ट्र की रक्षा शक्ति अभूतपूर्व शक्ति में बदल गई।
उन्होंने कहा कि रक्षा हर समय, इतिहास में और सभी लोगों के लिए प्रासंगिक है। नागरिक सुरक्षा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहाः मानव जीवन भी प्रकृति का हिस्सा है, प्रकृति में ऐसी घटनाएं होती हैं, जो मानव जीवन और उसकी सुरक्षा को परेशानी में डाल सकती हैं, प्रदूषण और विभिन्न रोगों से लेकर प्राकृतिक दुर्घटनाएं मानव सुरक्षा को ख़तरे में डालती हैं। लेकिन इंसान ने जबसे इस दुनिया में क़दम रखा है, वह इन चुनौतियों के मुक़ाबले में संघर्ष करता रहा है और अपनी रक्षा करता चला आ रहा है।
उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में इंसान के सामने अच्छाई और बुराई को पेश किया गया और इंसान के अंदर भी जो बुरी ताक़त है, उससे संघर्ष का रास्ता दिखाया गया है। इमाम ख़ुमैनी ने आज के बाहरी शैतान का परिचय देते हुए कहा था कि सबसे बड़ा शैतान अमरीका है और सर्वोच्च नेता ने भी कहा है कि अमरीका दुनिया के शैतानों का मुखिया है। इसलिए, स्वाभाविक रूप से जहां भी अत्याचार और अतिक्रमण करने वाली शैतानी ताक़तें होती हैं, जो शैतानी व्यवस्था क़ायम करना चाहती हैं, उनसे मुक़ाबले और संघर्ष के लिए किसी के पास शक्ति होनी चाहिए।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि एक दिन वह था जब ईरान का दुश्मन आक्रामक स्थिति में था, लेकिन आज ईरान जहां रक्षात्मक रूप से शक्तिशाली है, वहीं वह आक्रामक रूप से भी दुश्मनों के लिए एक बुरा सपना बन चुका हैं।