अरबईन महदवी आंदोलन है, इमामे जुमा तेहरान
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तेहरान में जुमे की नमाज़ के ख़ुत्बों में इमामे जुमा ने कहा कि अरबईन, एक महाकाव्य, तर्कसंगतता और एक नई सांस्कृतिक नीति है।
(last modified 2023-09-01T11:15:51+00:00 )
Sep ०१, २०२३ १३:०७ Asia/Kolkata
  • अरबईन महदवी आंदोलन है, इमामे जुमा तेहरान

तेहरान में जुमे की नमाज़ के ख़ुत्बों में इमामे जुमा ने कहा कि अरबईन, एक महाकाव्य, तर्कसंगतता और एक नई सांस्कृतिक नीति है।

तेहरान में जुमे की नमाज़ के ख़ुत्बों में हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने कहाः अरबईन महाकाव्य, तर्कसंगतता और नई सांस्कृतिक नीति है। यह एक भावनात्मक और शक्तिशाली आंदोलन है और सभी लोगों को चेहरे में एक चेहरा दिखाई देता है, और वह इमाम हुसैन (अ) का चेहरा है।

तेहरान के इमामे जुमा का कहना था कि यह एक सेवा भाव है और महदवी जीवन शैली है, यहां स्वाभिमानी लोग हर किसी की सेवा करने के लिए तत्पर हैं।

हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने कहा कि अरबईन के अवसर पर लाखों लोगों का पैदल चलकर कर्बला पहुंचना और रास्ते में लाखों और करोड़ों लोगों की निस्वार्थ सेवा, महदवी आंदोलन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि इस्लाम की इस तरह की सामूहिक इबादतों से दुश्मनों को निराशा होती है, इसीलिए वह इस तरह के धार्मिक आयोजनों में रुकावटें उत्पन्न करना चाहते हैं।

ग़ौरतलब है कि अरबईन या चेहलुम, इमाम हुसैन (अ) और उनके 72 साथियों की कर्बला में शहादत को चालीस दिन पूरे होने पर मनाया जाता है। शिया मुसलमान इस अवसर पर शोक सभाएं आयोजित करते हैं और जुलूस निकालते हैं।

अरबईन के अवसर पर इराक़ और पूरी दुनिया से बड़ी संख्या में शिया मुसलमान, इमाम हुसैन (अ) के रौज़े पर हाज़िरी देने के लिए कर्बला पहुंचते हैं। ज़ायरीन की एक बड़ी तादाद पवित्र शहर नजफ़ से कर्बला तक का क़रीब 85 किलोमीटर का सफ़र पैदल तय करती है। msm