हमने नहीं बनने दी दाइश की सरकार
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ईरान के इस्लामी क्रांति संरक्षक बल की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर ने कहा है कि तकफ़ीरियों के मुक़ाबले में ईरान का प्रतिरोध, सीरिया में दाइश की सरकार के गठन में रुकावट बना।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May २८, २०१६ १६:३० Asia/Kolkata
  • हमने नहीं बनने दी दाइश की सरकार

ईरान के इस्लामी क्रांति संरक्षक बल की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर ने कहा है कि तकफ़ीरियों के मुक़ाबले में ईरान का प्रतिरोध, सीरिया में दाइश की सरकार के गठन में रुकावट बना।

मेजर जनरल क़ासिम सुलैमानी ने नई संसद के साथ बेहतर ताल-मेल के लिए आयोजित होने वाली एक बैठक में देश के प्रतिरक्षा व सुरक्षा विभाग के समर्थन के लिए संसद सभापति डाॅक्टर लारीजानी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि इस समय क्षेत्र में हमारी स्थिति, ख़ुर्रमशहर की स्वतंत्रता के लिए चलाए गए बैतुल मुक़द्दस अभियान के बाद जैसी है। उन्होंने कहा कि इसी अभियान के बाद 15 हज़ार इराक़ी सैनिकों को ईरान ने बंदी बना लिया और आर्थिक व राजनैतिक दृष्टि से उसकी स्थिति बहुत मज़बूत हो गई। उन्होंने कहा कि हर विजय के बाद एक नया दबाव सामने आता है और हर दिन हम शत्रु की सीधी व गंभीर उपस्थिति देख रहे हैं। मेजर जनरल क़ासिम सुलैमानी ने कहा कि अमरीकी, सद्दाम से मिल गए ईरान के विरुद्ध पूरब और पश्चिम तथा रुढ़िवादी अरबों ने गठजोड़ कर लिया और आज भी यही स्थिति है। उन्होंने कहा कि हम अमरीका की तरह किसी देश पर हमला नहीं करते और केवल कुछ सीमित काम करते हैं लेकिन हमारा एक आंतरिक तर्क है जिसका उदाहरण इराक़ में स्वयं सेवी बल का गठन है। क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर ने कहा कि इराक़ के इन स्वयं सेवियों ने तीन दिन के भीतर युद्ध में जीत हासिल की और तिकरीत को केवल पांच प्रतिशत क्षति के साथ मुक्त करा लिया जबकि अमरीका ने रुमादी को 95 प्रतिशत नुक़सान के साथ स्वतंत्र कराया और इस शहर को मिट्टी के ढेर में बदल दिया।


हिज़्बुल्लाह क्षेत्र में गंभीर प्रतिरोधक क्षमता का स्वामी


मेजर जनरल क़ासिम सुलैमानी ने इसी तरह लेबनान की स्थिति की ओर संकेत करते हुए कहा कि लेबनान में दुश्मन का लक्ष्य हिज़्बुल्लाह को तबाह करना था लेकिन हर बार परिणाम उलटा निकला अतः आज हिज़्बुल्लाह के महासचिव की ओर से जो भी घोषणा की जाती है उसे दुश्मन गंभीर संदेश के रूप में प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह तीन मंचों पर अत्यधिक प्रभावी है। शत्रु पर, जिसे इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हिज़्बुल्लाह उसे पराजित कर सकता है, दूसरे आंतरिक मंच पर और तीसरे क्षेत्रीय मंच पर और इसी लिए उस पर दबाव बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि शत्रु अलमनार टीवी चैनल को भी सहन नहीं कर पा रहे हैं और उसे उपग्रह चैनलों की सूचि से हटा रहे हैं।


अगर ईरान का प्रतिरोध न होता तो दाइश सीरिया में सरकार बना लेता


ईरान के इस्लामी क्रांति संरक्षक बल की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर ने सीरिया के ताज़ा हालात की ओर इशारा करते हुए कहा कि सीरिया संकट के आरंभ में ईरान में निर्णय लेने में कुछ मतभेद थे ताकि शिया व सुन्नी मुसलमानों में फूट न पड़ जाए लेकिन फिर आवश्यक फ़ैसले किए गए जिनमें संसद सभापति अली लारीजानी की भी अहम भूमिका थी। मेजर जनरल क़ासिम सुलैमानी ने कहा कि अगर इस्लामी गणतंत्र ईरान, तकफ़ीरियों के हमलों के ख़िलाफ़ प्रतिरोध न करता तो आज सीरिया में दाइश की सरकार होती और अगर ईरान का प्रतिरोध न होता तो सीरिया की स्थिति से लेबनान भी प्रभावित होता, जैसा कि आज इराक़ में दाइश ने बहुत सारे इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर रखा है और लोगों के गले काट रहा है। इस गुट ने अलअंबार प्रांत में सैकड़ों सुन्नी मुसलमानों काे गले काटे और यही स्थिति लेबनान में भी पैदा हो सकती थी। (HN)