ईसीओ में ईरान की भूमिका, पाकिस्तान ने मदद का हाथ बढ़ा दिया
पाकिस्तान के प्रधान मंत्री अनवारुल हक़ काकर ने ईरान के माध्यम से क्षेत्रीय संचार के लिए आर्थिक सहयोग संगठन "ईसीओ" की क्षमताओं का उपयोग करने पर ज़ोर दिया है।
आर्थिक सहयोग संगठन "ईसीओ" की स्थापना 1985 में ईरान, पाकिस्तान और तुर्किए द्वारा सदस्य देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी लेकिन इसके सदस्य तेजी से बढ़ते गए और अफ़ग़ानिस्तान, आज़रबाइजान गणराज्य, क़ज़ाक़िस्तान, क़िर्गिस्तान, ताजेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान को भी इसमें जोड़ा गया है और इस तरह से अब ईसीओ के सदस्यों की संख्या दस हो गयी है।
हालांकि इस संगठन ने अपनी क्षमताओं के अनुरूप कार्य नहीं किया है। इसीलिए इस्लामी गणतंत्र ईरान की भौगोलिक क्षमताओं और परिवहन मार्गों का लाभ उठाने के लिए पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री के बयानों से ईसीओ को अधिक सक्रिय करने की उम्मीदें बढ़ जाती हैं।
इस्लामाबाद के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि वह ईसीओ पर विशेष ध्यान दे क्योंकि इस संगठन में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी विकसित करने की अपार क्षमताएं पायी जाती हैं।
पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री अनवारुल हक़ काकर के मुताबिक, मध्य एशिया तक पहुंच के लिए इस्लामाबाद ने क्वेटा-तफ़्तान रेलवे लाइन के नवीनीकरण और ईरान के मार्ग के इस्तेमाल को अपने एजेंडे में रखा है।
राजनीतिक मुद्दों के विशेषज्ञ मंसूर अहमद ख़ान कहते हैं कि आज की अंतरराष्ट्रीय स्थिति में, सड़कों, गलियारों और संचार मार्गों की अंतरराष्ट्रीय सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका है इसीलिए पाकिस्तान, ईरान के साथ संचार सड़कों को फिर से खोलने की बात करने लगा है।
पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री अनवारुल हक़ काकर के मुताबिक आर्थिक सहयोग संगठन "ईसीओ" के सदस्य देशों की क्षमताओं का उपयोग, मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर, सड़क, रेल और हवाई गलियारों को खोलना पाकिस्तान सरकार की प्राथमिकताएं हैं।
यहां पर इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि पाकिस्तानी राजनेता मुख्य रूप से अपने देश की सामाजिक स्थिति के अनुसार ही रुख अपनाते हैं और व्यवहारिक रूप से कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की जाती।
इस संबंध में ईरान से पाकिस्तान तक गैस पाइपलाइन का उल्लेख करना ज़रूरी हो जाता है जो पाकिस्तानी राजनेताओं की बयानबाज़ियों के बावजूद कई दशकों से उसी हाल में है।
राजनीतिक मुद्दों के विशेषज्ञ अकरम आरेफ़ी कहते हैं कि ईसीओ संगठन के सदस्य के रूप में पाकिस्तान, ईरान और तुर्किए के बीच संबंधों में विस्तार की काफी संभावनाएं हैं और ईरान यूरोप, मध्य एशिया और काकेशस में प्रवेश का बेहतरीन रास्ता है लेकिन अभी तक इन क्षमताओं से कोई फ़ायदा नहीं उठाया गया जबकि ऐसा लगता है कि पाकिस्तान इस संबंध में दृढ़ है।
हालिया वर्षों में पाकिस्तान, दक्षिण काकेशस में अपना प्रभाव विकसित करने के लिए अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारत के साथ काफी प्रतिस्पर्धा कर रहा है और इस संबंध में ईरान निश्चित रूप से पाकिस्तान के लिए एक उपयुक्त संचार माध्यम हो सकता है क्योंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कोई भी हलचल पैदा करने के लिए क्षेत्रीय बाजारों तक सुरक्षित, सस्ती और कम पहुंच की आवश्यकता होती है। (AK)
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