उल्टा चोर कोतवाल को डांटे
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनआनी ने कहा कि जैसाकि बारमबार बल देकर कहा गया है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण था और शांतिपूर्ण रहेगा।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बड़ी हास्यापस्द बात है कि खुद यूरोपीय देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में वर्तमान परिस्थिति के ज़िम्मेदार हैं और वे दूसरे को ज़िम्मेदार बताने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर यह है कि ये देश दूसरे को ज़िम्मेदार बताने और राजनीति से प्रेरित दृष्टिकोण अपनाने के बजाये ईरान पर लगे प्रतिबंधों के संबंध में पिछले दो वर्षों तक जो वार्ता हुई उस पर एक नज़र डालें और अपनी गैर रचनात्मक नीति का परिणाम देख लें।
इसी प्रकार विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान में 60 प्रतिशत यूरेनियम का संवर्द्धन देश की शांतिपूर्ण ज़रूरतों के अनुसार है और यह कार्य परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी के निगरानी में था और रहेगा। नासिर कनआनी ने कहा कि ईरान समस्त अंतरराष्ट्रीय कानूनों और अपने अधिकारों को जानता है और इसी परिप्रेक्ष्य में एजेन्सी के साथ अपने सहयोग को जारी रखेगा। विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वार्ता न करना और गैर संबंधित विषयों को पेश करने से अमेरिका और तीन यूरोपीय देशों के लिए एसी स्थिति नहीं उत्पन्न हो जाती है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में दावा कर सकें। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि अनुभव ने दर्शा दिया है कि एकपक्षीय मांग और पश्चिमी देशों द्वारा अपनी गलतियों को न सुधारने की इच्छा, सहायक नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान अतीत की भांति वार्ता को परमाणु गतिविधियों के बारे में मौजूद बनावटी चिंताओं को दूर करने का बेहतरीन मार्ग समझता है और इस समय गेंद अमेरिका और तीन यूरोपीय देशों के पाले में है।
वास्तविकता यह है कि ईरान की परमाणु गतिविधियां पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं और इस बात की पुष्टि परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी ने बारमबार अपनी रिपोर्टों में भी की है और ईरान की शांतिपूर्ण गतिविधियों के संबंध में जो इस समय स्थिति है उसके ज़िम्मेदार अमेरिका और उसके पिछलग्गू यूरोपीय देश हैं।
अमेरिका और यूरोपीय देशों ने परमाणु समझौते में किये गये अपने वचनों पर न केवल अमल नहीं किया बल्कि यह दिखाने के प्रयास में हैं कि ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों के संबंध में जो हालात हैं उसका ज़िम्मेदार ईरान है जबकि इन देशों को भलीभांति ज्ञात है कि वर्तमान हालात के ज़िम्मेदार वे हैं क्योंकि अगर इन देशों ने अपने वचनों पर अमल किया होता तो यह स्थिति उत्पन्न ही न होती।
सवाल यह पैदा होता है कि अमेरिका और उसकी हां में हां मिलाने वाले यूरोपीय देशों ने परमाणु समझौते में अपने वचनों पर क्यों अमल नहीं किया? इसके जवाब में जानकार हल्कों का मानना है कि अगर अमेरिका और यूरोपीय देश परमाणु समझौते में उल्लेखित अपने वचनों पर अमल करते और उसके प्रति कटिबद्ध रहते तो किस बहाने से ईरान को प्रगति से रोकने के लिए तेहरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाते?
रोचक बात यह है कि राष्ट्रसंघ ने प्रस्ताव नंबर 2231 पारित करके ईरान के साथ होने वाले समझौते पर अपनी मुहर लगायी और इसे एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के रूप में मान्यता दी उसके बावजूद अमेरिका एकपक्षीय रूप से इस अंतरराष्ट्रीय समझौते से निकल गया और यूरोपीय देशों ने कभी भी अमेरिका के इस कदम की भर्त्सना तक नहीं की और अब बड़ी निर्लज्जता के साथ अमेरिका और यूरोपीय देश कहते हैं कि ईरान परमाणु समझौते पर अमल नहीं कर रहा है जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। MM
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