ईरानी डिस्ट्रोयर "अलबुर्ज़"लालसागर पहुंच गया
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​​​​​​​ईरानी नौसेना का डिस्ट्रोयर "अलबुर्ज़" बाबुल मंदब स्ट्रेट पार करके लाल सागर पहुंच गया है।
(last modified 2024-01-03T02:14:46+00:00 )
Jan ०३, २०२४ ०७:४३ Asia/Kolkata
  • ईरानी डिस्ट्रोयर

​​​​​​​ईरानी नौसेना का डिस्ट्रोयर "अलबुर्ज़" बाबुल मंदब स्ट्रेट पार करके लाल सागर पहुंच गया है।

समाचार एजेन्सी ईरान प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी नौसेना ने स्वतंत्र जलक्षेत्रों में सुरक्षा की पूर्ति और समुद्री डाकुओं से रक्षा के लिए वर्ष 2009 से अपना कार्य आरंभ किया है।

इसी बीच गज्जा युद्ध के दौरान, अदन की खाड़ी में होने वाले परिवर्तनों और बाबुल मंदब स्ट्रेट में तनावों में वृद्धि हो गयी है।

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने कुछ समय पहले घोषणा की थी कि वह हर उस जहाज़ को बाबुल मंदब से गुज़रने की अनुमति नहीं देगा जो अवैध अधिकृत फिलिस्तीन की ओर जाना चाहता है। अंसारुल्लाह के इस बयान के बाद अमेरिका ने अपने युद्धपोतों को रवाना करके और इस्राईल के हितों की सुरक्षा के लिए एक समुद्री गठबंधन बनाने का प्रयास किया था परंतु फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे कुछ देशों ने इस गठबंधन का विरोध किया है।

ईरानी डिस्ट्रोयर अलबुर्ज़ को मरम्मत करने और आधुनिकतम तकनीक से लैस करने के बाद नौसेना में शामिल कर लिया गया है। यह डिस्ट्रोयर 48 साल से अधिक पुराना है और इसका पुनर्निर्माण करके इसे आधुनिकतम तकनीक से लैस किया गया है।

जानकार हल्कों का मानना है कि अगर ईरान तथाकथित बड़ी शक्तियों और वर्चस्ववादी देशों से डरता तो कभी भी इतना शक्तिशाली न बन पाता इस प्रकार से कि वह आज बड़ी शक्तियों की आंखों की किरकिरी बना हुआ है।

इसी प्रकार इन हल्कों का मानना है कि ईरान की मज़बूती का एक कारण यह है कि वह दूसरों पर भरोसा करने के बजाये अपनी आंतरिक क्षमताओं व संभावनाओं से लाभ उठा रहा है और महान ईश्वर के बाद अपनी क्षमताओं व लोगों पर भरोसा करता है। MM

नोटः यह लेखक के निजी विचार हैं पार्सटूडे का इनसे सहमत होना ज़रूरी नहीं हैं। 

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