क्या पैग़ाम लेकर ईरान आ रहे हैं भारत के विदेश मंत्री
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर रविवार को दो दिवसीय दौरे पर तेहरान पहुंच रहे हैं जहां उनकी मुलाक़ात ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान से होगी।
पिछले साल ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने भारत का दौरा किया था और वहां उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष के अलावा इस देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाक़ात की थी। इसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्री अब तेहरान आ रहे हैं।
भारत के विदेश मंत्री इससे पहले कह चुके हैं कि भारत चाबहार के ज़रिए सेंट्रल एशिया के देशों ही नहीं रूस और यूरोप से भी जुड़ सकता है। चाबहार बंदरगाह को विकसित करने में भारत क योगदान रहा है और यह बंदरगाह क्षेत्रीय व्यापार का ट्रांज़िट केन्द्र है।
चाबहार का फ़्री ट्रेड ज़ोन एक तो हिंद महासागर को सेंट्रल एशिया, काकेशिया और यूरोप से जोड़ता है और दूसरी तरफ़ अफ़ग़ानिस्तान तक प्रत्यक्ष पहुंच को भी संभव बनाता है। भारत चाहता है कि सड़क और रलवे मार्गों के ज़रिए अपने उत्पाद अफ़ग़ानिस्तान पहुंचाए वहां के प्राकृतिक संसाधनों से लाभ उठाए जो कम क़ीमत पर उपलब्ध हैं। इससे पहले भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच लेनदेन पाकिस्तान के इलाक़ों से गुज़र कर होता था। भारत पाकिस्तान तनाव और पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान तनाव के चलते समस्याएं पैदा हुई हैं। इसलिए भारत और अफ़ग़ानिस्तान दोनों देशों की ओर से चाबहार का रास्ता इस्तेमाल करने पर बहुत ज़ोर है। दोनों देशों के अधिकारियों ने ईरान के दौरों में इस विषय को विस्तार से उठाया है।
अफ़ग़ानिस्तान की तालेबान सरकार में आर्थिक मामलों के अधिकारी मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर ने पिछले पतझड़ में चाबहार का दौरा किया था और चाबहार बंदरगाह की क्षमताओं का मुआइना किया था।
भारत के स्ट्रैटेजिक मामलों के विशेषज्ञ गौतम मुखर्जी का इस बारे में कहना है कि चाबहार बंदरगाह महासागर को जोड़ने वाली बहुत अहम बंदरगाह है इससे ट्राज़िट भी सुचारू रूप से होगी और साथ ही ईरान की हैसियत क्षेत्र ही नहीं दुनिया के एक बड़े खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो जाएगी।
चाबहार बंदरगाह को अधिक से अधिक विकसित करने के लिए तेहरान और नई दिल्ली के बीच संबंधों के विस्तार की कोशिशों के सिलसिले में इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि दोनों देशों के संबंध कई सौ साल पुराने हैं और इनके अनेक आयाम हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के रिश्तों में उतार चढ़ाव भी आए लेकिन रिश्ते हमास धीरे धीरे आगे बढ़ते रहे हैं। भारत की कांग्रेस पार्टी हो या भाजपा दोनों ही ईरान से अच्छे रिश्ते की पक्षधर हैं।
यही वजह है कि ईरान से क़रीबी रिश्ते भारत के लिए अहम हैं क्योंकि भारत को क्षेत्र में अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने के लिए और क्षेत्र में अपने आर्थिक व सुरक्षा हितों की हिफ़ाज़त के लिए ईरान के सहयोग की ज़रूरत है। ईरान भारत अफ़ग़ानिस्तान तीन पक्षीय समझौता भी एक बड़ा कारण है कि भारत ईरान को स्ट्रैटेजिक महत्व की नज़र से देखे।
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