आईएईए ईरान पर दबाव के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रेशर टूल
इस्लामी गणराज्य ईरान ने अपनी प्रतिबद्धता के दायरे से भी आगे जाकर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए से सहयोग किया है लेकिन पश्चिमी देश इसके बावजूद आईएईए के माध्यम से ईरान पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं।
आईएईए महानिदेशक राफ़ाए ग्रोसी ने तकनीकी बयान के बजाए एक राजनैतिक बयान दाग़ दिया कि ईरान ने आईएईए के साथ सहयोग को पश्चिम से अपने मतभेदों के कारण हाईजैक कर कर लिया है। उन्होंने दावोस बैठक के अवसर पर दावा किया कि ईरान ने आईएईए के कुछ पर्यवेक्षकों को उनकी नागरिकता के आधार पर अस्वीकार कर दिया। यह बाहरी घटनाओं के आधार पर हमें दंडित करने का एक तरीक़ा है। जब फ़्रांस, ब्रिटेन या अमरीका कोई एसा काम करते हैं जो ईरान को पसंद न हो तो ईरन आईएईए को दूसरों से अपने विवादों के आधार पर हाईजैक कर लेता है। यह हमारे लिए स्वीकार करने योग्य नहीं है।
ईरान पर इस तरह का बेतुका आरोप आईएईए प्रमुख पहले भी लगा चुके हैं। उन्होंने इससे पहले ईरान की ओर से आईएईए के कुछ पर्यवेक्षकों के लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद दावा किया था कि इन फ़ैसलों का आईएईए की गतिविधियों पर असर पड़ेगा।
मार्च 2023 में तेहरान यात्रा में ग्रोसी ने ईरान की संसद के क़ानून के दायरे में आईएईए के पर्यवेक्षकों के अधिक पर्यवेक्षण और सत्यापन की गतिविधियों के स्वेच्छा से अंजाम दिए जाने पर सहमति जताई थी।
यह एसी स्थिति में है कि अमरीका परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से निकल चुका है जबकि इस्लामी गणराज्य ईरान स्वेच्छा से सहयोग भी कर रहा है।
ईरान ने आईएईए की ओर से इस प्रकार के आरोपों का हर बार कड़ाई से खंडन किया है। ईरान ने यह भी कहा है कि सेफ़गार्ड के तहत देशों की प्रतिबद्धताएं असीमित नहीं हैं उनकी भी कोई सीमा है।
ग्रोसी लाइसेंस रद्द किए जाने की जो बात कर रहे थे वह लगभग चार महीने पहले ईरान से आठ पर्यवेक्षकों के लाइसेंस रद्द किए जाने की ओर इशारा है। ईरान को समझौते के अनुसार यह अधिकार है कि अगर चाहे तो कुछ पर्यवेक्षकों के लाइसेंस रद्द कर दे। इस समय आईएईए के पास ईरान से विशेष 117 पर्यवेक्षक हैं इसलिए राफ़ाएल ग्रोसी की ओर से कुछ नामों की ज़िद करना अकारण है।
आईएईए के प्रमुख के इन बयानों से इस धारणों को बल मिल रहा है कि आईएईए अपनी तकनीकी ज़िम्मेदारियों के बाहर जाकर राजनैतिक दबाव डालने की कोशिश करती है और ईरान पर दबाव डाल कर उससे रियायत लेने की कोशिश में है।
इस्लामी गणराज्य ईरान का कहना है कि आईएईए को चाहिए कि ईरान की नागरिक परमाणु गतिविधियों के मामले में पेशावराना ज़िम्मेदारियों पर अमल करे और पश्चिमी देशों या ज़ायोनी शासन के हाथ का हथियार बनने की कोशश न करे।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनआनी ने इस बारे में कहा कि ग्रोसी सेफ़गार्ड के नियमों को नज़रअंदाज़ करते हुए इस तरह की मांगें कर रहे हैं कि जो ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और अमरीका की ओर से की जाती रही हैं। जबकि इस प्रकार की मांगें ईरान की प्रतिबद्धता से बाहर हैं। अगर आईएईए प्रमुख इस तरह के बयान देते रहे तो इससे आईएईए को नुक़सान पहुंचेगा। उनका यह रवैया आईएईए के सदस्य देशों के साथ सहयोग के संदर्भ में सार्थक भी नहीं है।
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