आतंकवाद के समर्थन के अमरीकी दावे पर ईरान का जवाब
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरान का नाम आतंकवाद के समर्थक देशों की सूचि में शामिल करने के अमरीका के क़दम की कड़ी आलोचना की है।
सादिक़ हुसैन जाबिरी अंसारी ने एक बयान जारी करके आतंकवाद के बारे में अमरीकी विदेश मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के बारे में कहा है कि इस रिपोर्ट में ईरान द्वारा आतंकवाद के समर्थन का झूठा आरोप लगा कर सच्चाइयों का मज़ाक़ उड़ाया गया है और यह रिपोर्ट अमरीकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्टों के निराधार होने की एक बार फिर पुष्टि करती है।
अमरीका की नज़र में आतंकवाद की परिभाषा, वाॅशिंग्टन के राजनैतिक लक्ष्यों से समन्वित है। यह परिभाषा इस प्रकार की है कि इसमें स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अतिग्रहित राष्ट्रों के क़ानूनी संघर्ष को आतंकवाद बताया जाता है। उदाहरण स्वरूप, फ़िलिस्तीन का अतिग्रहण करने वाले ज़ायोनियों के मुक़ाबले में फ़िलिस्तीनी गुटों के प्रतिरोध को आतंकवाद बताया जाता है और इस आधार पर उनके संघर्ष का समर्थन करने के कारण ईरान पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाया जाता है। यह एेसी स्थिति में है कि अमरीका, सरकारी आतंकवाद के सबसे बड़े समर्थक के रूप में कई दशकों से ज़ायोनी शासन का हर संभव समर्थन करके फ़िलिस्तीनी जनता को उसके मूल अधिकारों से वंचित कर रहा है। अमरीका का यह दोहरा व्यवहार सिर्फ़ आतंकवाद के बारे में ही नहीं है बल्कि मानवाधिकार के मामले में भी उसका यही रवैया है।
जैसा कि ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा है, अमरीका इस प्रकार के क्रियाकलाप द्वारा और अपने दायित्वों की अनदेखी करके अन्य देशों, सरकारों व राष्ट्रों पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप नहीं लगा सकता। ईरान एक एेसा देश है जिसके सत्रह हज़ार से अधिक नागरिक आतंकवादी कार्यवाहियों में शहीद हो चुके हैं और इस दृष्टि से वह आतंकी गुटों की कार्यवाहियों की भेंट चढ़ने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है। ये एेसे गुट हैं जिन्हें अमरीका का सीधा समर्थन प्राप्त है। (HN)