प्रतिरोध मोर्चे का यथासंभव समर्थन करेंगेः जनरल सलामी
https://parstoday.ir/hi/news/iran-i136780-प्रतिरोध_मोर्चे_का_यथासंभव_समर्थन_करेंगेः_जनरल_सलामी
पार्सटुडे- इस्लामी क्रांति के संरक्षक बल सिपाहे पासदारान (आईआरजीसी) के प्रमुख ने बल देकर है कि दुनिया की किसी भी ताक़त के अंदर सिपाहे पासदारान की थल, वायु और नौसेना पर हावी होने की क्षमता व सकत नहीं है।
(last modified 2025-01-03T06:17:24+00:00 )
Dec २४, २०२४ १४:१५ Asia/Kolkata
  • प्रतिरोध मोर्चे का यथासंभव समर्थन करेंगेः जनरल सलामी
    प्रतिरोध मोर्चे का यथासंभव समर्थन करेंगेः जनरल सलामी

पार्सटुडे- इस्लामी क्रांति के संरक्षक बल सिपाहे पासदारान (आईआरजीसी) के प्रमुख ने बल देकर है कि दुनिया की किसी भी ताक़त के अंदर सिपाहे पासदारान की थल, वायु और नौसेना पर हावी होने की क्षमता व सकत नहीं है।

मेजर जनरल हुसैन सलामी ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान की ताक़त सीमाओं से बढ़कर है।

 

उन्होंने कहा कि सिपाहे पासदारान की शक्ति महान ईश्वर की असीमित शक्ति से जुड़ी है और हमारी ताक़त ईरान की सीमाओं से बढ़कर है और हमारे समस्त दुश्मनों को चाहिये कि वे अपने समीकरणों में इस बिन्दु को ध्यान में रखें। क्योंकि उनकी पहली ग़लती आख़िरी ग़लती व भूल हो सकती है।

 

पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार मेजर जनरल सलामी ने नमाज़ के संबंध में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि ईरानी राष्ट्र को चाहिये कि वह दुश्मनों की जटिल शैलियों को समझे व जाने क्योंकि दुश्मन परिवर्तनों के बोझ को ईरानी राष्ट्र के कांधों पर अधिक करना और कहना चाहते हैं कि क्षेत्र में ईरान की भुजा कट गयी है। उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीन अभी ज़िन्दा है और हम यथासंभव प्रतिरोध मोर्चे का आध्यात्मिक और राजनीतिक समर्थन करेंगे किन्तु वे हमारी तरह अपने हथियारों की ज़रूरत को खुद पूरा करते और खुद बनाते हैं।

 

इसी प्रकार उन्होंने कहा कि ज़ायोनी दुश्मन सोचता है कि वह महिलाओं, बच्चों और निहत्थे लोगों की हत्या करके ग़ज़ा में कामयाब हो गया है परंतु वास्तविकता यह है कि ज़ायोनी आज पहले से अधिक परेशान होकर ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं और वे बंद गली में पहुंच गये हैं और उनका भविष्य स्पष्ट नहीं है।

 

सिपाहे पासदारान के प्रमुख कमांडर मेजर जनरल हुसैन सलामी ने सीरिया में होने वाले परिवर्तनों की ओर संकेत करते हुए कहा कि ज़ायोनी दुश्मन सीरिया की भूमि के कुछ भाग पर क़ब्ज़ा करते हैं क्या उनके इस कब्ज़े से उनकी समस्या का समाधान होता है? इस काम से वे मुसलमानों का हाथ खोल रहे हैं और मोमिन संघर्षकर्ताओं के लिए जंग की दूसरी ज़मीन तैयार कर रहे हैं, क्या ज़ायोनी इस पवित्र क्रोध और जेहाद करने हेतु प्रतिरोध की भावना के मुक़ाबले में सुरक्षित ज़िन्दगी कर सकते हैं? क्या ज़ायोनी दूसरों के क़ब्ज़ा किये हुए मकानों में सुकून से रह सकते हैं?

 

मेजर जनरल हुसैन सलामी ने समाज में नमाज़ के अदा किये जाने की ओर संकेत करते हुए अंत में बल देकर कहा कि अगर हम नमाज़ के असर को रणक्षेत्र में देखना चाहते हैं तो काफ़ी है कि ग़ज़ा को देखें कि फ़िलिस्तीनी बच्चे क़ुरआन की आयतों की तिलावत करते हैं और हिज़्बुल्लाह के जवान उस कठिन स्थिति में विजयी हुए और इस्राईल को नाकाम बना दिये और वे शक्तिशाली हो गये। MM

 

इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान, नमाज़, प्रतिरोध मोर्चा, पराजित व नाकाम ज़ायोनी सरकार