ईरान के क़ज़्ज़ाक़ और क़ज़्ज़ाक़िस्तान के ईरानी दोनों देशों की सामाजिक पूंजी
पार्सटुडे- क़ज़्ज़ाक़िस्तान के अलमाती शहर में ईरान के सांस्कृतिक केन्द्र के प्रमुख ने कहा है कि ईरान के क़ज़्ज़ाक़ और क़ज़्ज़ाक़िस्तान के रहने वाले ईरानी दोनों देशों की सामाजिक पूंजी हैं।
ईरान के कल्चरल हाउस के प्रमुख हुसैन आक़ाज़ादे ने "ईरान के क़ज़्ज़ाक़" शीर्षक के अंतर्गत किताब के विमोचन समारोह में कहा कि क़ज़्ज़ाक़ ईरान गये और ईरानी पलायन करके क़ज़्ज़ाक़िस्तान आये और हर एक ने अपने मेज़बान देश की सेवा की और व्यक्तिगत और सामाजिक ज़िन्दगी की प्रगति व विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पार्सटुडे ने समाचार एजेन्सी इस्ना के हवाले से बताया है कि पलायन एक सामाजिक चीज़ है और उसका प्रभाव पलायन करने वाले इंसान की समस्त ज़िन्दगी पर पड़ता है और उसके विभिन्न पहलु हैं।
आक़ाज़ादे ने कहा कि शीर्घ ही "उबूर अज़ फ़ूलाद" नामक एक डाक्युमेंट्री फ़िल्म दिखाई जायेगी जिसमें ईरान पलायन करने वाले क़ज़्ज़ाक़ों के जीवन आदि को दिखाया गया है। यह फ़िल्म ईरान के सांस्कृतिक केन्द्रों के समर्थन से तैयार की गयी है।
ईरान में विभिन्न जातियां व क़ौमें रहती हैं। पड़ोसी देशों में जंगें और क्रांतियां विभिन्न गुटों के ईरान पलायन का कारण बनी हैं।
जो लोग पलायन करके ईरान आये उनमें से कुछ लोग ईरान के उत्तरी क्षेत्रों में रहते थे और वे मुख्यरूप से अक्तूबर वर्ष 1917 में रूस में आने वाली क्रांति के समय सेन्ट्रल एशिया और काकेशिया से पलायन कर गये।
ईरान में रहने वाली क़ज़्ज़ाक़ कौम भी इन्हीं पलायनकर्ताओं में से है और वह 20वीं सदी के आरंभिक 50 वर्षों के अंदर ईरान आयी थी।
साम्यवादी क्रांति, अकाल, भूख और निर्धनता क़ज़्ज़ाक़ों के पलायन के दो महत्वपूर्ण कारण थे। ...MM