इमाम ख़ामेनेई के विचार | ईरानी राष्ट्र ज़ोर- ज़बरदस्ती के आगे नहीं झुकेगा
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ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह इमाम ख़ामेनेई
पार्सटुडे – इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह इमाम ख़ामेनेई ने कहा कि प्रतिबंधों का मक़सद ज़ोर ज़बरदस्ती पर आधारित अपनी माँगों के आगे झुकाना और अपनी वर्चस्ववादी मांगों को थोपना है।
इसी प्रकार उन्होंने ज़ोर देकर कहा: ईरानी क़ौम ऐसी ज़ोरज़बर्दस्ती के आगे नहीं झुकती।
पार्स-टुडे ने KHAMENEI.IR के हवाले से बताया है कि हज़रत आयतुल्लाह इमाम ख़ामेनेई ने एक मुलाक़ात में, जो ईरानी मज़दूरों से थी, कहा: "हम सालों से सख़्त प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं, उन प्रतिबंधों को, जिन पर खुद प्रतिबंध लगाने वालों, जिसका ज़्यादातर मतलब अमेरिकियों और उनके बाद कुछ यूरोपीय देशों से है, ने कहा कि ये जो प्रतिबंध ईरान के ख़िलाफ़ लगाए गए हैं, इतिहास में बेमिसाल हैं! उन्होंने स्वयं कहा। ठीक है सबसे पहले यह पूछिए कि इन प्रतिबंधों का मकसद क्या है? वे कुछ मकसद बताते हैं, मगर वे झूठ बोलते हैं मकसद वे नहीं हैं। वे परमाणु ऊर्जा का मुद्दा उठाते हैं, परमाणु हथियार का मुद्दा उठाते हैं, मानवाधिकार का मुद्दा उठाते हैं बात वही नहीं है। वे कहते हैं हम ईरान को इसलिए प्रतिबंधित कर रहे हैं कि वह आतंकवाद का समर्थन करता है! 'आतंकवादी' कौन हैं? ग़ाज़्ज़ा के लोग! उन बंदों की नज़र में ग़ाज़्ज़ा के लोग आतंकवादी हैं! एक दुष्ट, नकली, ज़ालिम, ज़ालिम कब्ज़ा करने वाली सरकार ने दसियों हज़ार लोगों को मारा, जिनमें कई हज़ार बच्चे हैं, वह जनसंहार करता है, मगर वह आतंकवादी नहीं है और वे लोग जिन पर उसके बमबारी हो रही है, वे आतंकवादी हैं! तो ये बहाने, झूठे बहाने हैं प्रतिबंधों का मकसद ये चीज़ें नहीं हैं। प्रतिबंधों का मकसद इस्लामी ईरान को तंग करना है। वे चाहते हैं कि प्रतिबंधों के ज़रिये इस्लामी सरकार को तंग कर दिया जाए सख्ती में रखा जाये तो क्या होगा? ताकि वह उनके साम्राज्यवादी और प्रभुत्ववादी इच्छाओं का पालना करे, ज़ोर ज़बरदस्ती पर आधारित उनकी मांगों के समक्ष झुक जाये, अपनी नीतियों को उनकी नीतियों के अनुसार बना ले, यही मक़सद है।"
इस्लामी राष्ट्र ऐसे ज़ोरज़बर्दस्ती के आगे कभी नहीं झुकेगा
इमाम ख़ामेनेई ने कहा: राजनीतिक मामलों में, आर्थिक मामलों में और देश की समग्र नीतियों में, वे सिर्फ यह चाहते हैं कि ईरान उनकी नीतियों का पालन करे। वे कहते हैं कि हमारे सामने पूरी तरह समर्पण कर दो; वही स्थिति जो कुछ सरकारों में देखी जाती है, उनकी दौलत उनके हाथ में है, उनकी प्रतिष्ठा उनके हाथ में है, उनकी नीतियाँ उनका अनुसरण करती हैं यही वे चाहते हैं।
लेकिन स्पष्ट है कि इस्लामी शासन, इस्लामी गौरव, और इस महान एवं ऐतिहासिक इस्लामी राष्ट्र के लिए असंभव है कि वह ऐसी ज़ोरज़बर्दस्ती के आगे झुके।
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह इमाम ख़ामेनेई ने यह भी कहा कि प्रतिबंध ईरान के भीतर प्रतिभाओं के विकास का कारण बनते हैं। यही प्रतिबंध ईरान की क्षमताओं को सामने लाते हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रतिबंध धीरे-धीरे अपना प्रभाव खो देते हैं उन्होंने कुछ सालों तक प्रतिबंध लगाए, लेकिन देखा कि इसका कोई फायदा नहीं हुआ। विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार इस वर्ष ईरान का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है।
क्यों बढ़ा? क्योंकि लोग ज़्यादा मेहनत करते हैं, बेहतर काम करते हैं, प्रतिबंध उन्हें नीचे नहीं गिरा पाते और वे बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं रहते। इस भावना को बढ़ावा देना चाहिए इस आत्मविश्वास को पूरे देश में मजबूत करना चाहिए।
प्रतिबंध अवसर भी हैं
इमाम ख़ामेनेई ने ईरानी उत्पादकों और आर्थिक गतिविधियों में लगे लोगों से कहा: हमारे पास विदेशी समस्याएँ, प्रतिबंध और विभिन्न दुश्मनीयाँ हैं, लेकिन यही हमारे लिए अवसर भी बन सकती हैं।
हालाँकि प्रतिबंध हानि पहुँचाने वाले और निस्संदेह समस्याएँ पैदा करने वाले हैं, फिर भी इन्हें विकास और प्रगति के लिए अवसर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
ईरान की सभी प्रगति प्रतिबंधों के समय हुई
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह इमाम ख़ामेनेई ने इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के तीर्थयात्रियों और श्रृद्धालुओं के बैठक में कहा: हमने कई प्रगति हासिल की है और ये सभी प्रगति प्रतिबंधों के दौरान हुई। ऐसी परिस्थितियों में ईरानी राष्ट्र ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, परमाणु तकनीक और रक्षा क्षेत्रों में प्रगति की। mm