पाकिस्तानी राजनेता: इस्लामी दुनिया को ईरान के साथ खड़ा होना चाहिए
-
पाकिस्तान में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी के अध्यक्ष मौलाना फ़ज़लुर्रहमान
पार्सटुडे- पाकिस्तान की जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी के अध्यक्ष ने ईरान के विरुद्ध अमेरिका और इज़राइल की धमकियों की निंदा करते हुए इस्लामी दुनिया द्वारा ईरान के समर्थन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
पाकिस्तान में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी के अध्यक्ष मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने ईरान के इस्लामी गणराज्य के विरुद्ध अमेरिका और इज़राइल के धमकीभरे रवैये की प्रतिक्रिया में संयुक्त रक्षात्मक मोर्चे को मज़बूत करने की मांग की और कहा: इस कठिन दौर में इस्लामी दुनिया को ईरान के साथ खड़ा होना चाहिए।
पार्स-टुडे के अनुसार फ़ज़लुर्रहमान ने लाहौर शहर में अपने बयान में कहा: अब मज़बूत इस्लामी एकता दिखाने का समय है और हम सभी को एक साझा मोर्चे पर इन धमकियों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा: इस्लामी दुनिया को एक साझा रक्षा संधि की छत्रछाया में एकत्र होना चाहिए।
इसी बीच पाकिस्तान की जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख सिराजुल हक़ ने ईरान के विरुद्ध ट्रंप के धमकीभरे बयानों की निंदा करते हुए कहा: ईरान पर हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति की बेतुकी बातें अन्य स्वतंत्र देशों के तेल भंडारों की लूट के लिए अमेरिकियों की उसी पुरानी साज़िश को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा: अब समय आ गया है कि सभी इस्लामी देश भाईचारे वाले देश ईरान के साथ खड़े हों और हम सभी विशेष रूप से पाकिस्तान में मौजूदा हालात के प्रति सतर्क रहें।
सिराजुल हक़ ने ज़ोर देकर कहा: इस्लामी दुनिया को केवल राजनीतिक दिखावे और निंदा तक सीमित न रहकर व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए।
पाकिस्तान के पूर्व संसदीय मामलों के मंत्री और वर्तमान सांसद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ से संबद्ध अली मुहम्मद ख़ान ने भी कहा: हम पाकिस्तान में अपने भाई और इस्लामी देश ईरान के साथ किसी भी विदेशी आक्रमण और बाहरी समर्थन प्राप्त साज़िश के विरुद्ध खड़े हैं।
उन्होंने बल देकर कहा: ईरान के इस्लामी गणराज्य की संप्रभुता किसी भी हालत में समझौते के लिए नहीं है।
पाकिस्तान की सीनेट की रक्षा मामलों की समिति के पूर्व अध्यक्ष और राजनीतिक विश्लेषक मुशाहिद हुसैन सैयद ने इस्लामाबाद में जियो न्यूज़ नेटवर्क को दिए एक साक्षात्कार में कहा: अमेरिका को यह समझ लेना चाहिए कि ईरान, वेनेज़ुएला नहीं है और जनता को भड़काने तथा इस्लामी गणराज्य की व्यवस्था पर दबाव डालने के प्रयास असफल होंगे।
उन्होंने ज़ोर दिया: पाकिस्तान को ईरान की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ खड़ा होना चाहिए, किसी भी प्रकार के शासन परिवर्तन या सैन्य विकल्प का विरोध करना चाहिए और विदेशी हस्तक्षेप को अस्वीकार करना चाहिए। mm