म्यूनिख सम्मेलन और ईरान
विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा है कि क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए वास्तविकता को स्वीकार करना होगा।
म्यूनिख सम्मेलन में बोलते हुए ईरान के विदेशमंत्री ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर संकेत किया जो विश्व शांति के बारे में ईरान के दृष्टिकोण के परिचायक हैं। वर्तमान समय में विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा आतंकवाद और अतिवाद से है। इस समय विश्व शांति के लिए संयुक्त ख़तरा आतंकवाद है। इससे मुक़ाबले के लिए विश्व के सभी देशों को एक-दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए। यहां पर यह सवाल पैदा होता है कि वर्तमान परिस्थतियों और कुछ देशों के बीच तनावपूर्ण संबन्धों को देखते हुए क्या एेसा संभव है? इस बारे में ईरान के विदेशमंत्री ने कहा कि मेरा यह मानना है कि हमें संयुक्त ख़तरे का सामना है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एेसी समस्या है जिसका सामना पश्चिमी जगत को भी है। फ़ार्स की खाड़ी के बारे में जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि हम यह चाहते हैं कि फ़ार्स की खाड़ी मेें शांति रहे। वहां से निर्बाध ढंग से तेल की आपूर्ति होती रहे और फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देश, शांति एवं सुरक्षा का आभास करें। ईरान के विदेशमंत्री ने कहा कि यदि विगत को अनदेखा किया जाए तो संयुक्त चुनौतियों विशेषकर आतंकवाद का मुक़ाबला संयुक्त रूप में किया जा सकता है।
यह एक वास्तविकता है कि शांति से संबन्धित वर्तमान चुनौतियों का मुक़ाबला करने के लिए बहुत गंभीरता की आवश्यकता है। इन बातों के बावजूद सऊदी अरब एेसा देश है जो दूसरे देशों की अशांति में ही अपनी शांति देखता है। इस देश ने यमन पर आक्रमण करके वहां पर तबाही मचा रखी है और सीरिया की वैध सरकार को गिराने के लिए वह आतंकवादियों का सहारा लिए हुए है। सऊदी अरब के विदेशमंत्री ने म्यूनिख सम्मेलन में रियाज़ की इस नीति का खुलकर समर्थन किया है। हालांकि जानकारों का कहना है कि वर्तमान क्षेत्रीय संकट का मार्ग, परस्पर सहयोग के अतिरिक्त कुछ अन्य नहीं है।