27 जून की त्रासदी, अमरीका समर्थित आतंकवाद का एक प्रमाण
इस्लामी गणतंत्र ईरान के इतिहास में एेसी बहुत सी कटु घटनाएं हैं जिनके पीछे साम्राज्यवादी शक्तियों की भूमिका रही है।
इस प्रकार की घटनाओं में हिजरी शम्सी महीने तीर के दूसरे हफ्ते या फिर 26 जून से 2 जूलाई तक के दिनों को एेसा हफ्ता कहा जाता है जिसका उदाहरण ईरान के इतिहास में नहीं मिलता। ईरान की इस्लामी क्रांति के इस एक हफ्ते का इतिहास एेसी आतंकी घटनाओं के भरा हुआ है जिसके पीछे अमरीका और उसके घटकों का हाथ साबित हो चुका है।
इस सप्ताह में ईरान की नवोदित इस्लामी क्रांति के खिलाफ एमकेओ के हमले अपने चरम पर थे। 26 जून सन 1981 को वर्तमान वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई पर तेहरान की अबूज़र मस्जिद में भाषण के दौरान आतंकवादी हमला हुआ। इस हमले के एक ही दिन बाद अर्थात 27 जून सन 1981 को इस्लामी गणतंत्र ईरान के इतिहास का सब से भयानक व भीषण धमाका हुआ और ईरान के खिलाफ आतंकवादी हमलों का नया चरण आरंभ हो गया।
27 जून सन 1981 को होने वाले आतंकवादी बम धमाके में उच्चतम न्यायलय के तत्कालीन प्रमुख आयतुल्लाह डॅाक्टर सैयद मोहम्मद हुसैनी बहिश्ती और 4 मंत्रियों 12 उप मंत्रियों और 30 सांसदों सहित 72 लोग शहीद हो गये।
इसी प्रकार 29 अगस्त सन 1981 में एक आतंकवादी बम विस्फोट में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति मुहम्मद अली रजाई और प्रधानमंत्री मुहम्मद जवाद बाहुनर शहीद हो गये।
यह सारी कार्यवाहियां आतंकवादी गुट एमकेओ ने की थी और इसकी ज़िम्मेदारी स्वीकार की थी किंतु अमरीका ने यह सब कुछ जानते हुए भी 28 सितम्बर सन 2012 में इस गुट का नाम आतंकवादी संगठनों की सूचि से निकाल दिया और इस गुट का समर्थन खुल कर करने लगा।
ईरान को, इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद व्यापक रूप से आतंकवादी हमलों का सामना करना पड़ा है और आतंकवादी हमलों में 17 हज़ार लोगों की जान गयी है जिनमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस, मंत्री , सांसद और फौजी जनरल जैसे लोग शामिल हैं और इस प्रकार के अधिकांश हमलों के जि़म्मेदार एमकेओ को अमरीका का आशीर्वाद प्राप्त है।
वरिष्ठ नेता ने 27 जून सन 1981 की आतंकवादी घटना में शहीद होने वालों के परिजनों से शनिवार को अपनी भेंट में कहा कि इस आतंकवादी अपराध के ज़िम्मेदार क्रूर व घृणित गुट के सदस्य ईरान से भागने के बाद वर्षों से युरोपीय देशों और अमरीका की शरण में ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं जो आतंकवाद के खिलाफ युद्ध और मानवाधिकार की रक्षा का दावा करते हैं। वरिष्ठ नेता ने 27 जून सन 1981 की त्रासदी को बहुत बड़ी घटना बताया कि जिसमें बहुत से पाठ निहित हैं। (Q.A.)