राष्ट्रपति की यूरोप यात्रा
इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति सोमवार को इटली के लिए रवना हो गए ताकि परमाणु समझौते के क्रियान्वयन के बाद ईरान व यूरोप के बीच संंबंधों का नया चरण आरंभ कर सकें।
डाॅक्टर हसन रूहानी ने, जो इटली के बाद औपचारिक यात्रा पर फ़्रान्स जाएंगे, तेहरान से रवाना होने से पहले कहा कि इस यात्रा में इटली व फ़्रान्स के साथ ईरान के सहयोग के मध्यकालीन व दीर्घकालीन रोड मैप के दस्तावेज़ की समीक्षा की जाएगी। राष्ट्रपति रूहानी पिछले साल 14 नवम्बर को यूरोप की यात्रा करने वाले थे लेकिन पेरिस पर हुए आतंकी हमले और इस देश में आपातकाल की घोषणा के कारण उनकी यात्रा विलम्बित कर दी गई थी। पिछले दो साल के दौरान और ईरान के परमाणु मामले के समाधान और प्रतिबंधों की समाप्ति के लिए आरंभिक सहमति के बाद यूरोप के विभिन्न देशों के बड़े बड़े प्रतिनिधि मंडलों ने ईरान की यात्रा की ताकि ईरान के साथ व्यापारिक व आर्थिक सहयोग व संबंध का नया चरण आरंभ करने के लिए अपनी तैयारी की घोषणा कर सकें।
इटली उन देशों में से है जिन्होंने प्रतिबंधों के दौरान भी ईरान के साथ अपने व्यापारिक व आर्थिक संबंधों के भाग को सुरक्षित रखा था और शायद यही कारण है कि राष्ट्रपति रूहानी ने परमाणु समझौते के क्रियान्वयन के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए इटली का चयन किया। वे इस यात्रा में इटली की एक आर्थिक बैठक में भाग लेंगे जिसमें इस देश के पांच सौ से अधिक उद्योगपति शामिल होंगे। क्षेत्र के परिवर्तनों और क्षेत्रीय संकटों के समाधान में ईरान की प्रभावी भूमिका के दृष्टिगत, इस संबंध में वार्ता व परामर्श, रोम व पेरिस में राष्ट्रपति रूहानी के वार्तालाप के मुख्य मुद्दों में शामिल है।
इटली के राष्ट्रपति सरजो मातारला ने कहा है कि ईरान की भूमिका केवल क्षेत्रीय मामलों में ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मामलों में भी बहुत अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि श्री रूहानी की यूरोप की यात्रा का इटली से आरंभ, दोनों देशों के निकट व मैत्रिपूर्ण संबंधों का सूचक है। उन्होंने ईरान के परमाणु समझौते और इस देश पर लगे प्रतिबंधों की समाप्ति पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह समझौता, क्षेत्र व संसार की शांति व स्थिरता के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और नई परिस्थितियों में ईरान व इटली के आर्थिक संबंधों में काफ़ी विस्तार आ सकता है।
राष्ट्रपति रूहानी की इटली व फ़्रान्स के दौरे में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे और उनकी इस यात्रा से अन्य देशों को ईरान के साथ संबंध विस्तार के लिए सकारात्मक संदेश जाएंगे। यही कारण है कि संसार के सभी बड़े संचार माध्यम उनकी इस यात्रा को व्यापक कवरेज दे रहे हैं। (HN)