ईरान के तेल समझौता का नया प्रारूप, आंतरिक क्षमताएं बढ़ाने पर ज़ोर
ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बीजन नामदार ज़ंगने ने तेल उद्योग से संबंधित नए समझौतों के प्रारूप में किए जाने वाले बदलाव का ब्योरा देते हुए कहा कि समझौतों का नया प्रारूप ईरान की पैदावारी क्षमता बढ़ाने पर केन्द्रित रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन बढ़ाने का यही एक मात्र उपाय नहीं है बल्कि इसके लिए आंतरिक क्षमताओं और राष्ट्रीय विकास कोष को भी प्रयोग किया जाएगा।
ज़ंगने ने कहा कि हमारे सामने सबसे बड़ा लक्ष्य दक्षिणी आज़ादगान और दक्षिणी पार्स फ़ेज़ 11 सहित तेल मैदानों को डेवलप करना है। अब तक दक्षिणी पार्स के 2, 3, 4, 5 नंबर के फ़ेज़ तथा सुरूश और नौरूज़ तेल मैदान पारस्परिक समझौतों के तहत विकसित किए जा चुके हैं।
तेल के नए भंडारों की खोज की प्रक्रिया का विस्तार, तेल व गैस की उत्पादन क्षमता में वृद्धि, भंडारों से री प्रोसेसिंग की दर में वृद्धि, घरेलू तकनीक का विकास तथा तेल उद्योग में गतिविधियों के लिए निजी सेक्टर की क्षमताओं को बढ़ाना नए तेल समझौतों के घोषित सिद्धांत हैं।
तेल व गैस के उत्पादन में वृद्धि के लिए सक्षम मैदानों की खोज ज़रूरी है साथ ही यह भी ज़रूरी है कि स्थानीय तकनीक व क्षमताओं को बढ़ाया जाए। इसीलिए ईरान की नई योजना में देश के निजी सेक्टर को भागीदार बनाए जाने को अनिवार्यता के रूप में दृष्टिगत रखा गया है।
यदि तेल उद्योग और इसके विकास की योजनाओं पर नज़र डाली जाए तो ऐसा लगता है कि जब भी तेल और गैस सेक्टर के विकास की बात होती है उसमें विश्व की बड़ी कंपनियों पर निर्भरता की बात भी निहित रहती है। यह निर्भरता तेल उद्योग के मूल ढांचे की कमज़ोरी रही है। कभी कभी ईरान के तेल उद्योग में विदेशी पूंजीनिवेश की भी मुश्किल दिखाई देती है। ईरान ने लगातार यह कोशिश की कि तेल उद्योग की कमियों तथा बड़ी कंपनियों पर निर्भरता को दूर किया जाए और नए समझौतों से संबंधित योजना की एक विशेषता यही है कि इनसे ईरान तेल उद्योग की कमज़ोरियों से दूर हो जाएगा। अतीत की तुलना में अब ईरान की परिस्थितियां बिल्कुल भिन्न हैं। नए हालात में मौजूद अवसरों को सही प्रकार से उपयोग करके बड़ी कंपनियों को ईरान की प्रतिरोधक अर्थ व्यवस्था को व्यवहारिक बनाने का साधन बनाया जा सकता है।