बहरैनवासी प्रतिरोध के मार्ग पर डटे रहेंः आयतुल्लाह अहमद ख़ातेमी
आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ातेमी ने कहा है कि आले ख़लीफ़ा शासन, बहरैनवासियों के साथ अत्याचारपूर्ण व्यवहार कर रहा है।
आयतुल्लाह ख़ातेमी ने तेहरान में जुमे की नमाज़ में बहरैन के हालिया परिवर्तनों की ओर संकेत करते हुए कहा कि बहरैन के तनाशाह शासक इस देश की जनता के विरुद्ध जघन्य अपराध कर रहे हैं।
उन्होंने बहरैन के शासको द्वारा इस देश के वरिष्ठ धर्मगुरू शेख ईसा क़ासिम की नागरिकता समाप्त किये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी ही सरकार को इस प्रकार से नागरिकता छीनने का अधिकार नहीं है।
आयतुल्लाह अहमद ख़ातेमी ने कहा कि बहरैन के धर्मगुरूओं ने विश्व के समस्त मुसलमानों से सहायता मांगते हुए कहा है कि इस समय उनकी पहचान को गंभीर ख़तरा है।
आयतुल्लाह ख़ातेमी ने बहरैन की जनता से अनुरोध किया है कि वे प्रतिरोध के मार्ग को अपनाए और उसी पर डटे रहें।
आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ातेमी ने जेसीपीओए के लागू किये जाने के बारे में संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव बान की मून की रिपोर्ट को अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एेसे महासचिव से और क्या आशा की जा सकती है जो ज़ायोनियों के दबाव में रिपोर्ट तैयार करे और मानवाधिकारों का हनन करने वालों की लिस्ट से सऊदी अरब का नाम निकालने के लिए उससे डालर ले।
उन्होंने पश्चिमी देशों को सचेत करते हुए कहा कि यदि वे इस्लामी गणतंत्र ईरान के विरुद्ध कोई ही ग़लती करेंगे तो उन्हें निश्चित रूप में पछताना पड़ेगा।
आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ातेमी ने अपने जुमे के भाषण में तुर्की में किये जाने वाले सैन्य विद्रोह की निंदा की। उन्होंने हालिया दिनों में फ़्रांस के नीस नगर में की गई आतंकवादी कार्यवाही की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि आतंकवादी कार्यवाही विश्व के किसी भी क्षेत्र में की जाए वह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि फ़्रांस में जो कुछ भी हुआ उसके बीच पश्चिमी देशों ने ही बोए थे।
आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ातेमी ने अपने भाषण के अंत में बल देकर कहा कि पश्चिम को आतंकवाद का समर्थन बंद करना चाहिए और आतंकवाद को बुरे और अच्छे आतंकवाद में बांटना बहुत ग़लत है।