यमन में आले सऊद शासन के अपराध निंदनीय, हुज्जतुल इस्लाम क़ाज़िम सिद्दीक़ी
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तेहरान के जुमे के इमाम ने यमन में आले सऊद शासन के अपराध की भर्तस्ना करते हुए इस शासन के क़दम को अंतर्राष्ट्रीय क़ानून और इस्लामी मानदंडों के ख़िलाफ़ बताया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul २९, २०१६ १२:२३ Asia/Kolkata
  • तेहरान में 29 जुलाई 2016 की जुमे की नमाज़ से पहले भाषण देते हुज्जतुल इस्लाम क़ाज़िम सिद्दीक़ी
    तेहरान में 29 जुलाई 2016 की जुमे की नमाज़ से पहले भाषण देते हुज्जतुल इस्लाम क़ाज़िम सिद्दीक़ी

तेहरान के जुमे के इमाम ने यमन में आले सऊद शासन के अपराध की भर्तस्ना करते हुए इस शासन के क़दम को अंतर्राष्ट्रीय क़ानून और इस्लामी मानदंडों के ख़िलाफ़ बताया।

तेहरान की जुमे की नमाज़ के विशेष भाषण में हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने दक्षिणी यमन के तइज़ प्रांत के सरारी गांव में आले सऊद शासन के भाड़े के सैनिकों के अपराध की कड़े शब्दों में भर्त्सना की।

ज्ञात रहे मंगलवार को सऊदी अरब के भाड़े के सैनिकों ने सरारी गांव के 50 नागरिकों को ज़िन्दा जलाकर मार डाला और दसियों लोगों को क़ैदी बना लिया।

 

जुमे के इमाम ने कहा कि सरारी गांव में आतंकियों का अपराध न सिर्फ़ यह कि इस्लाम के ख़िलाफ़ है बल्कि ऐसा अमानवीय अपराध है कि कोई भी मानवाधिकार का समर्थक इसे सही नहीं क़रार देगा।

हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने कहा कि आले सऊद शासन ऐसी स्थिति में क्षेत्र के देशों के ख़िलाफ़ आपराधिक नीति अपनाए हुए है कि ख़ुद को 2 पवित्र स्थलों मक्का व मदीना का सेवक और मुसलमान कहता है।

तेहरान के जुमे के इमाम ने इसी प्रकार काबुल के हालिया आतंकवादी हमले की भर्त्सना करते हुए बल दिया कि अफ़ग़ान सरकार और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को पीड़ित अफ़ग़ान जनता के लिए सुरक्षा व शांति मुहैया करने में अपनी नाकामी का जवाब देना चाहिए।

उन्होंने इसी प्रकार काबुल के आतंकवादी हमले के ज़िम्मेदारों को जल्द से जल्द गिरफ़्तार करके सज़ा देने पर बल दिया।

 

तेहरान के जुमे के अस्थायी इमाम हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने बहरैनी जनता के ख़िलाफ़ आले ख़लीफ़ा शासन के जारी अत्याचार के बारे में कहा कि ऐसी हालत में कि बहरैनी जनता राजशाही सरकार के ख़िलाफ़ पूरी तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है, आले ख़लीफ़ा के कारिंदे इन प्रदर्शनों का जवाब यातना से दे रहे हैं।

उन्होंने बहरैन के वरिष्ठ शिया धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता ख़त्म किए जाने के क़दम को अंतर्राष्ट्रीय व इस्लामी क़ानून के ख़िलाफ़ बताते हुए कहा कि आले ख़लीफ़ा शासन के धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा चलाने से न सिर्फ़ यह कि जनाक्रोश भड़केगा, बल्कि इसके नतीजे में बहरैनी सरकार के गिरने की प्रक्रिया और तेज़ हो जाएगी। (MAQ/N)