ईरान क्षेत्र में शांति व स्थायित्व की धुरी, राष्ट्रपति
https://parstoday.ir/hi/news/iran-i19489-ईरान_क्षेत्र_में_शांति_व_स्थायित्व_की_धुरी_राष्ट्रपति
इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति ने ईरान की आर्थिक दशा सकारात्मक बताया कि जिसका भविष्य उज्जवल है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug ०२, २०१६ २३:४३ Asia/Kolkata
  • ईरान क्षेत्र में शांति व स्थायित्व की धुरी, राष्ट्रपति

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति ने ईरान की आर्थिक दशा सकारात्मक बताया कि जिसका भविष्य उज्जवल है।

राष्ट्रपति हसन रूहानी ने मंगलवार की रात टीवी पर लाइव वार्ता में कहा कि गत तीन वर्षों के दौरान, सशस्त्र सेना के प्रयासों और जनता के संकल्प से ईरान में अदभुत रूप से शांति व स्थिरता व्याप्त रही और यह स्थिति जारी रहेगी। 

राष्ट्रपति ने ईरान और गुट पांच धन एक के साथ हुए परमाणु समझौते के बारे में पूछे गये एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि दूसरा पक्ष अर्थात गुट पांच धन एक के सदस्य देशों ने ज्वांइट एक्शन प्लान को लागू करने के संदर्भ में लापरवाही बरती किंतु इसके बावजूद इस समझौते से ईरान और उसकी अर्थ व्यवस्था के लिए अच्छा माहौल पैदा हुआ। 

राष्ट्रपति रूहानी ने तेल के उत्पादन और निर्यात में तेज़ी से होने वाली वृद्धि से संबंधित आंकड़े पेश किये और कहा कि 400 से अधिक विदेशी बैक, ईरान के संपर्क में हैं और इस संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। 

राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ईरान के खिलाफ धमकी व खतरे के वातावरण के अंत को भी परमाणु समझौते का एक परिणाम बताया और कहा कि दुश्मन ईरान के परमाणु मामले को सुरक्षा परिषद में और संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र के सातवें अध्याय के अंतर्गत ले आए थे और छे से सात प्रस्ताव भी ईरान के खिलाफ पारित कर दिया था जिसकी वजह से ईरान को किसी भी समय, अनचाहे युद्ध का सामना करना पड़ सकता है किंतु आज एेसा कोई खतरा नहीं है। 

राष्ट्रपति ने कहा कि दुश्मनों ने इसी प्रकार आईएईए के प्रस्तावों में ईरान को विश्व शांति के लिए खतरा बना कर पेश किया था लेकिन आज ईरान से आतंकित करने की इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी गयी है। 

ईरान के राष्ट्रपति सैयद हसन रूहानी ने वरिष्ठ नेता के इस बयान का उल्लेख करते हुए कि अगर दूसरा पक्ष, अपने वचनों का पालन करता तो क्षेत्र और खुद दूसरे पक्ष के हित में होता और यह एक प्रकार से दूसरे पक्ष की परीक्षा थी, कहा कि अगर अमरीकी, सद्भावना के साथ परमाणु समझौते का पालन करते और उसकी राह में रुकावट पैदा न करने देते तो हो सकता था कि ईरान दूसरे पक्ष पर भरोसा करता और किसी अन्य विषय पर भी उससे बात चीत करता। (Q.A.)