मिना त्रासदी का मामला अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में उठाने पर बल
पिछले साल हज के अवसर पर उत्पन्न होने वाली मिना त्रासदी के क़ानूनी और आधिकारिक मामलों को अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में उठाने पर ईरानी अधिकारी यथावत बल दे रहे हैं।
सऊदी अरब के अधिकारियों की अयोग्यता व कुप्रबंधन के कारण सामने आने वाली मिना त्रासदी हज के इतिहास की सबसे कटु घटनाओं में से एक है। सऊदी अधिकारियों के कुप्रंधन के चलते पिछले साल ईदुल अज़हा का त्योहार, अनेक हाजियों व उनके परिजनों के लिए शोक में बदल गया था। मिना में हज के संस्कार अंजाम देते समय हज़ारों हाजी अपनी जान से हाथ धो बैठे जिनमें 464 ईरानी थे। इस कटु घटना के बाद भी सऊदी अधिकारियों ने इसका दायित्व लेने से इन्कार किया और इसके लिए स्वयं हाजियों को दोषी ठहराया। उन्होंने मृतकों की पहचान करने और उनके शव स्वदेश पहुंचाने के मामले में भी बिल्कुल सहयोग नहीं किया। जब ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें ठोस चेतावनी दी तब जा कर उन्होंने मिना त्रासदी में हताहत होने वाले ईरानी हाजियों के शवों को स्वदेश पहुंचाने में सहयोग किया। ईरानी ही वह एकमात्र देश है जो पूरी गंभीरता के साथ इस मामले में सक्रिय रहा और अब भी ईरान के हज विभाग और विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के संबंध में गंभीर हैं।
इसी परिप्रेक्ष्य में ईरान के अटाॅर्नी जनरल की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मिना त्रासदी के मामले को उठाने के संबंध में की गई कार्यवाहियों की एक रिपोर्ट पेश की गई। इस बैठक में अटाॅर्नी जनरल ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से कहा कि वे मिना त्रासदी के मामले को इस प्रकार आगे बढ़ाएं कि इस घटना की बरसी से पहले ही कोई अंतर्राष्ट्रीय कार्यवाही हो जाए। मिना त्रासदी के बाद ईरान व सऊदी अरब के संबंधों में बहुत अधिक तनाव आ गया है और दोनों देशों के राजनैतिक संबंध समाप्त हो चुके हैं। सऊदी अरब ने वातावरण से ग़लत लाभ उठाते हुए इस साल ईरानी श्रद्धालुओं को हज जैसे अनिवार्य धार्मिक संस्कार की अनुमति नहीं दी। ईरान चाहता है कि एेसे क़दम उठाए जाएं कि भविष्य में मिना जैसी त्रासदी उत्पन्न न हो और सऊदी अधिकारी इस मामले में अपनी ग़लती को स्वीकार करके उसकी भरपाई करें लेकिन सऊदी अरब शत्रुता पर उतर आया है और उसने ईरानी श्रद्धालुओं को हज से रोक कर अपनी दुश्मनी खुल कर प्रकट कर दी है। (HN)