ईरान के विरुद्ध मानवाधिकार संबंधी प्रस्ताव के पीछे राजनैतिक लक्ष्य हैः क़ासेमी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा की तीसरी समिति की ओर से ईरान के विरुद्ध मानवाधिकार संबंधी प्रस्ताव को राजनैतिक लक्ष्यों से प्रेरित बताते हुए ख़ारिज कर दिया है।
बहराम क़ासेमी ने मंगलवार की रात इस प्रस्ताव के पारित होने पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि यह प्रस्ताव, ईरान की वास्तविकताओं को ध्यान में रखे बिना केवल भेदभावपूर्ण और टकराव के विचारों और विशेष राजनैतिक लक्ष्यों के लिए संकलित व पारित किया गया है। उन्होंने कुछ देशों द्वारा मानवाधिकार के विषय से ग़लत लाभ उठाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, संसार के स्वाधीन देशों के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों की ओर से मानवाधिकार को हथकंडे और राजनैतिक चाल के रूप में इस्तेमाल किए जाने की कड़ी निंदा करता है। क़ासेमी ने कनाडा सहित इस प्रस्ताव के कुछ समर्थकों और प्रस्तुतकर्ताओं के बारे में कहा कि हास्यास्पद बात तो यह है कि ज़ायोनी शासन, सऊदी सरकार और क्षेत्र के प्रजातंत्र व स्वतंत्रता से कोसों दूर कुछ देशों ने, जो आतंकवाद के अस्ली समर्थक व जन्मदाता हैं, इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
ज्ञात रहे कि संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा की तीसरी समिति ने ईरान के विरुद्ध मानवधिकार के संबंध में एक अबाध्यकारी प्रस्ताव पारित करके अपने विचार में ईरान में मानवाधिकार की स्थिति पर चिंता प्रकट की है। मंगलवार की रात पारित होने वाले इस प्रस्ताव के पक्ष में 183 में से केवल 85 देशों ने मतदान किया, 63 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया और 35 ने इसका विरोध किया। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी कनाडा ने ईरान के विरुद्ध यह प्रस्ताव तैयार करके महासभा की तीसरी समिति में पेश किया था। इस प्रस्ताव के पारित होने पर राष्ट्र संघ में रूस के प्रतिनिधि ने इसे देशों के संबंध में राष्ट्र संघ के राजनैतिक रुख़ का प्रतीक बताया। वेनेज़ुएला के प्रतिनिधि ने अपनी सरकार और गुट निरपेक्ष आंदोलन के प्रतिनिधित्व में कहा कि ईरानी विरोधी यह प्रस्ताव राष्ट्र संघ के दोहरे रवैये को दर्शाता है। (HN)