अमेरिका के डेमाटो कानून की अवधि बढ़ाई गयी
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डेमाटो कानून से यूरोपीय संघ और एशियाई देशों की बहुत से कंपनियों को भी नुकसान पहुंचा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov १६, २०१६ १६:५१ Asia/Kolkata

डेमाटो कानून से यूरोपीय संघ और एशियाई देशों की बहुत से कंपनियों को भी नुकसान पहुंचा है।

डोनल्ड ट्रंप के सत्ता काल में अमेरिकी नीति क्या होगी आजकल राजनीतिक और प्रचारिक स्तर पर इसके बारे में चर्चा की जा रही है।

इसी तरह कुछ राजनीतिक हल्के ईरान के विरुद्ध संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों के बारे में भी चर्चा कर रहे हैं। इसी मध्य अमेरिकी सांसदों ने 15 नवंबर को डेमाटो कानून की अवधि में वृद्धि के पक्ष में मत दिया। डेमाटो वह कानून है जिसे ईरान के तेल उद्योग पर दबाव डालने के लिए संकलित किया गया और उसके लागू होने से बहुत सी अमेरिका की आर्थिक कंपनियों को क्षति पहुंची।

कई बार इस कानून की अवधि में वृद्धि की गयी और अब इसी कार्य की पुनरावृत्ति हो रही है। अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद अलफान्स डेमाटो ने वर्ष 1996 में ईरान के विरुद्ध आर्थिक प्रतिबंधों का                                                                                                               नया प्रस्ताव पेश किया था जिस पर सहमति हुई थी और अमेरिकी कांग्रेस में उसे पारित कर दिया गया था।

 

इस कानून के अनुसार जो भी सरकार या कंपनी चार करोड़ डॉलर से अधिक ईरान के तेल व गैस उद्योग में पूंजी निवेश करेगी उसे अमेरिका के आर्थिक दंड का सामना होगा। डेमाटो कानून के लागू होने से पहले और उसके बाद अमेरिका ने एक अप्रचलित नीति अपनाते हुए यूरोपीय संघ सहित दूसरे देशों से संपर्क किया और उनसे मांग की कि वे भी ईरान के विरुद्ध आर्थिक दंड की नीति अपनायें।

अमेरिका ने बारम्बार आर्थिक हथकंडे का प्रयोग किया है। इसका प्रयोग उसने न केवल ईरान बल्कि रूस, क्यूबा और लैटिन अमेरिका सहित दुनिया के बहुत से देशों के बारे में भी किया है। इस प्रकार की कार्यवाही से लाभ या नुकसान केवल एक पक्ष को नहीं पहुंचता है और तेल के संबंध में प्रतिबंध लगाने से केवल अमेरिकी कंपनियों को नुकसान नहीं पहुंचा बल्कि यूरोपीय संघ और एशियाई देशों की बहुत से कंपनियों को भी नुकसान पहुंचा है।

बहरहाल स्पष्ट है कि ईरान की अपनी आर्थिक नीतियां हैं और वह इस प्रकार की समस्याओं से मुकाबले का रास्ता जानता है और उस पर अमल करेगा। MM