प्रतिबंध कानून से परमाणु समझौते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगाः केरी
अमेरिकी सरकार परमाणु समझौते के विरुद्ध अनुच्छेदों पर पुनर्विचार नहीं करेगी
अमेरिकी विदेशमंत्री जॉन केरी ने कहा है कि ईरान विरोधी प्रतिबंध के कानून में वृद्धि, परमाणु समझौते के अनुरूप है। समाचार एजेन्सी इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी विदेशमंत्री जॉन केरी ने गुरूवार को दावा किया कि प्रतिबंधों के कानून में वृद्धि से परमाणु समझौते के अनुसार प्रतिबंधों के समाप्त करने या उन कंपनियों की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता जो ईरान से लेन- देन करना चाहती हैं।
अमेरिकी विदेशमंत्री जॉन केरी ने कहा कि अगर ईरान विरोधी प्रतिबंध के कानून में वृद्धि कर भी दी जाये तब भी अमेरिकी सरकार परमाणु समझौते के विरुद्ध अनुच्छेदों पर पुनर्विचार नहीं करेगी जिन्हें वह पहले ही विलंबित कर चुकी है।
अमेरिकी विदेशमंत्री ने इसी प्रकार दावा किया कि परमाणु समझौते के परिप्रेक्ष्य में जब तक ईरान अपने वचनों का पालन करेगा तब तक अमेरिका भी अपने वचनों के प्रति कटिबद्ध रहेगा। अमेरिकी विदेशमंत्री जॉन केरी का यह बयान ऐसे समय में सामने आ रहा है जब अमेरिकी सिनेट ने पहली दिसंबर को किसी विरोध के बिना 99 मतों से ईरान के विरुद्ध प्रतिबंध कानून की अवधि में वृद्धि का समर्थन किया था।
इससे पहले अमेरिकी सांसदों ने भी ईरान विरोधी प्रतिबंध के प्रस्ताव को पारित कर दिया था। वाइट हाउस ने इससे पहले घोषणा की थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा संभवतः इस कानून पर हस्ताक्षर करेंगे परंतु इस कानून पर हस्ताक्षर करने की समय सीमा बुधवार को समाप्त हो गयी और बराक ओबामा ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किया और उनके हस्ताक्षर के बिना यह स्वयं कानून बन गया।
इसी मध्य वाइट हाउस के प्रवक्ता जॉश अर्नेस्ट ने कहा है कि अगर अमेरिकी सांसदों व सिनेटरों ने ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते को समाप्त करने का फैसला किया है तो कांग्रेस को इस कार्यवाही से उत्पन्न गम्भीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेन्स में परमाणु समझौते के उल्लंघन के संबंध में कांग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका इस अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन करना चाहता है तो उसे गम्भीर परमाणों का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि बुधवार को राष्ट्रपति बराक ओबामा ने केवल इस कारण ईरानी विरोधी प्रतिबंध को वीटो नहीं किया कि वह ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते के अनुसार है।
ज्ञात रहे कि ईरान का मानना है कि किसी प्रतिबंध के कानून की अवधि में वृद्धि करने का अर्थ नया प्रतिबंध लगाना है और यह परमाणु समझौते का खुला उल्लंघन है। MM