महासभा का प्रस्ताव, सीरिया संकट बढ़ाने वालाः ईरान
संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के उप राजदूत ने कहा कि महासभा में सीरिया के विरुद्ध प्रस्ताव की मंज़ूरी, अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांतों और संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणापत्र का उल्लंघन करने की ओर एक ख़तरनाक क़दम है।
संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने बुधवार की रात लिख़ेन इश्ताइन और क़तर की ओर से पेश किए गये सीरिया विरोधी प्रस्ताव को ध्वनि मत से पास कर दिया। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रस्ताव का उद्देश्य, मार्च 2011 के बाद से सीरिया में होने वाले ख़तरनाक अपराधों की जांच के बारे में मदद देने के मार्ग खोजना है।
संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के उप राजदूत ग़ुलाम हुसैन दहक़ान ने इस प्रस्ताव पर ईरान के विरोध का कारण बताते हुए कहा कि विश्व समुदाय की ज़िम्मेदारी, आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध में सीरिया की सहायता करना है किन्तु उक्त प्रस्ताव की मंज़ूरी, इस लक्ष्य के विपरीत है। उन्होंने सीरिया विरोधी प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणापत्र और सीरिया की संप्रभुता का उल्लंन बताते हुए कहा कि आपराधिक कार्यवाहियां करने वालों को सज़ा देने और उनके विरुद्ध कार्यवाही का अधिकार केवल उन देशों को है जहां अपराध किए जाते हैं और महासभा में पास किया गया प्रस्ताव, सीरिया की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की राजनैतिक चालबाज़ियों और आपराधिक कार्यवाहियां करने वालों को सज़ाए दिलाए जाने के संबंध में इस संस्था के दोहरे मापदंड का उल्लेख करते हुए कहा कि उक्त प्रस्ताव में सीरिया में जारी आतंकवादी गुटों का कोई उल्लेख तक नहीं किया गया है बल्कि यह प्रस्ताव, उन देशों के हितों में तैयार किया गया है जिन्होंने सीरिया में आतंकी गुटों का गठन किया और वे उनकी वित्तीय सहायता कर रहे हैं। (AK)