सुरक्षा व स्थिरता, ईरान की क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय नीति का ध्रुव
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राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर क्षेत्रीय देश विकास करना चाहते हैं तो उनके पास सुरक्षा व स्थिरता को मज़बूत बनाने के अलावा और कोई मार्ग नहीं है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan ०२, २०१७ ११:५२ Asia/Kolkata

राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर क्षेत्रीय देश विकास करना चाहते हैं तो उनके पास सुरक्षा व स्थिरता को मज़बूत बनाने के अलावा और कोई मार्ग नहीं है।

डाॅक्टर हसन रूहानी ने टीवी से सीधे प्रसारित होने वाले अपने एक साक्षात्कर में सार्वजनिक सुरक्षा व स्थिरता की रक्षा को ईरान की विदेश नीति की प्राथमिकताओं में से एक बताते हुए कहा है कि गृह युद्ध और आंतरिक लड़ाइयां शांति व स्थिरता के लिए अत्यधिक ख़तरनाक सिद्ध हो सकती हैं लेकिन अतिग्रहण पूरे क्षेत्र को अशांत बनाने वाले सबसे मुख्य तत्वों में से एक है जिस प्रकार से कि आतंकवाद भी पूरे क्षेत्र और संसार के लिए बहुत बड़ा ख़तरा है। उन्होंने क्षेत्र में आतंकवाद से संघर्ष को ईरान का एक रणनैतिक लक्ष्य बताते हुए कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान इराक़ व सीरिया सहित आतंकवाद से लड़ाई में मदद के इच्छुक हर देश की सहायता करेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ लोग सीरिया, इराक़ और यमन को विभाजित करना चाहते थे लेकिन ईरान भौगोलिक सीमाओं में परिवर्तन का विरोधी है और समस्या के समाधान के लिए प्रतिरोध और कूटनीति पर बल देता है।

 

सीरिया संकट के समाधान में मदद के लिए ईरान की सक्रिय कूटनीति, उसकी विदेश नीति का एक स्पष्ट नमूना है। सीरिया संकट के हल में ईरान, सीरिया व रूस के त्रिपक्षीय सहयोग ने दर्शाया है कि कुछ मामलों में मतभेद के बावजूद ईरान, क्षेत्रीय क्षमताओं से लाभ उठा सकता है। क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियां इस वास्तविकता की सूचक हैं कि अगर सहयोग व समरसता न हो और क्षेत्र को अशांत बनाने वाले ख़तरों को सही ढंग से न समझा जाए तो इन ख़तरों से पहुंचने वाला नुक़सान काफ़ी व्यापक हो सकता है। आज आतंकवाद, न केवल इसे पोषित करने वाले कुछ क्षेत्रीय देशों बल्कि अमरीका तक के लिए डरावना सपना बन चुका है। अमरीका के हालिया राष्ट्रपति चुनाव के दौरान दोनों प्रत्याशियों ने इसके लिए एक दूसरे को दोषी ठहराने का प्रयास किया। बहरहाल इस बात में कोई शक नहीं है कि अमरीका के विस्तारवाद और अन्य शक्तियों के हस्तक्षेप के मुक़ाबले का एकमात्र मार्ग, क्षेत्र की शांति, सुरक्षा व स्थिरता को मज़बूत बनाना और हर संभावित ख़तरे से लड़ने के लिए तैयार रहना है। (HN)